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रविवार, 8 नवंबर 2026

विचार : बीजेपी को शून्य से शिखर तक पहुंचाये भारत रत्न लालकृष्ण आडवाणी

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भारतीय राजनीति में धार्मिक ध्रुवीकरण के अगुवा लालकृष्ण आडवाणी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को शून्य से सत्ता के शिखर तक पहुँचाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके समर्थक, पार्टी सहयोगी और कई राजनीतिक विश्लेषक देश के प्रति उनकी सेवाओं, उनके सांगठनिक कौशल और वैचारिक दृढ़ता के लिए उनका महिमामंडन (सराहना) करते हैं। इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद हुए 1984 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को केवल 2 सीटें मिली थीं। आडवाणी के कुशल नेतृत्व और रणनीतियों के कारण पार्टी ने 1989 में 86 सीटें और 1996 में 161 सीटें हासिल कीं, जिससे बीजेपी भारतीय राजनीति में एक केंद्रीय धुरी बनकर उभरी। वे तीन बार और सबसे लंबी अवधि तक भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की जोड़ी को 'राम-लक्ष्मण' की जोड़ी के रूप में देखा जाता था, जिन्होंने मिलकर गठबंधन सरकार (NDA) को सफलतापूर्वक चलाया।


आडवाणी ने 1990 में सोमनाथ से अयोध्या के लिए ऐतिहासिक राम रथ यात्रा निकाली। इस यात्रा ने देश में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और 'हिंदुत्व' की वैचारिक चेतना को मुख्यधारा की राजनीति में स्थापित किया।अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल (1998-2004) में उन्होंने भारत के 7वें उप-प्रधानमंत्री और सबसे लंबे समय तक गृह मंत्री के रूप में देश को आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर मजबूत नेतृत्व प्रदान किया।राष्ट्र के निर्माण और भारतीय राजनीति में उनके ऐतिहासिक योगदान के सम्मान में भारत सरकार ने उन्हें 2024 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से नवाजा। इससे पहले 2015 में उन्हें पद्म विभूषण भी दिया जा चुका था।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह जैसे नेताओं को गढ़ने और आगे बढ़ाने का श्रेय भी आडवाणी को ही दिया जाता है। राजनीतिक विरोधी उनकी 'रथ यात्रा' को देश में ध्रुवीकरण की राजनीति की शुरुआत मानते हैं, जिससे कई जगहों पर सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न हुआ था। इसके अतिरिक्त, विपक्षी दलों द्वारा समय-समय पर उनके राजनीतिक जीवन और उनके सम्मानों को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणियां भी की जाती रही हैं।




लोकनाथ तिवारी के फेसबुक वाल से

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