मुंबई : रोहन शुक्ला ने महाराष्ट्र के अन्नदाताओं के लिए बढ़ाया मदद का हाथ, 51 लाख रुपये की सहायता - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

बुधवार, 4 नवंबर 2026

मुंबई : रोहन शुक्ला ने महाराष्ट्र के अन्नदाताओं के लिए बढ़ाया मदद का हाथ, 51 लाख रुपये की सहायता

Rohan-shukla-donation-to-farmer
मुंबई (अनिल बेदाग): किसी भी संस्थान की असली पहचान सिर्फ उसकी व्यावसायिक सफलता, बड़ी परियोजनाओं और आर्थिक उपलब्धियों से नहीं होती, बल्कि समाज के प्रति उसकी जिम्मेदारी और जरूरत के समय मदद के लिए आगे आने की भावना से भी होती है। इसी सोच को सार्थक करते हुए रियल एस्टेट क्षेत्र में अपनी पहचान मजबूत कर रहे DGS ग्रुप ने महाराष्ट्र के सूखे से प्रभावित किसानों की मदद के लिए एक सराहनीय पहल की है। महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में सूखे के संकट और खेती-किसानी से जुड़ी चुनौतियों के बीच राज्य का अन्नदाता कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहा है। किसानों की चिंता केवल उनकी आजीविका तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर उनके परिवारों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में DGS ग्रुप के डायरेक्टर श्री रोहन शुक्ला ने संवेदनशीलता और सामाजिक प्रतिबद्धता का परिचय देते हुए किसानों की सहायता के लिए 51 लाख रुपये की आर्थिक मदद का चेक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री माननीय श्री देवेंद्र फडणवीस को सौंपा। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के विधायक श्री अतुल भातखळकर भी उपस्थित रहे। DGS ग्रुप की यह पहल एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि विकास का वास्तविक अर्थ तभी पूरा होता है, जब उसकी रोशनी समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। खासकर किसान, जो देश की अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा की मजबूत नींव हैं, उनके मुश्किल समय में सहयोग करना केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना का भी परिचायक है। रोहन शुक्ला की इस पहल को कॉरपोरेट जगत के लिए भी एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है। आज जब कंपनियां विकास, विस्तार और प्रतिस्पर्धा की दौड़ में आगे बढ़ रही हैं, ऐसे में समाज की जरूरतों को प्राथमिकता देना उन्हें एक अलग पहचान देता है।

कोई टिप्पणी नहीं: