दिल्ली : निर्वाचन आयोग ने पीलीभीत के दो ईआरओ को निलंबित करने का आदेश दिया - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 1 नवंबर 2026

दिल्ली : निर्वाचन आयोग ने पीलीभीत के दो ईआरओ को निलंबित करने का आदेश दिया

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नई दिल्ली। निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश के पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर दो मतदाता पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को निलंबित करने का निर्देश दिया है। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को शनिवार को भेजे पत्र में आयोग ने निर्देश दिया कि ईआरओ मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया जाए। पत्र में कहा गया है कि दोनों के खिलाफ आरोप पत्र जांच-पड़ताल के लिए निर्वाचन आयोग को सौंपे जाने चाहिए और आयोग की पूर्व अनुमति के बिना उन्हें बहाल नहीं किया जा सकता। निर्वाचन आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि दोनों ईआरओ और मतदाता पंजीकरण केंद्र के कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा-198 (लोक सेवक द्वारा किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने के इरादे से कानून की अवज्ञा करना) जोड़ी जाए। आयोग ने कहा कि आरोपी अधिकारियों से जुड़े मामलों में सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। विपक्षी दलों, मुख्य रूप से कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) की ओर से मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हेरफेर के आरोप लगाए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने इससे पहले जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे राज्य भर के मतदाता पंजीकरण केंद्रों पर मौजूद कंप्यूटर सहायकों की ईसीआईनेट पोर्टल आईडी को निष्क्रिय कर दें। यह निर्देश पीलीभीत में लॉग-इन संबंधी विवरण के कथित दुरुपयोग की शिकायतों के बाद दिया गया था। जिला निर्वाचन अधिकारियों से यह भी कहा गया है कि वे अपने अधीन ऑपरेटर के रूप में काम कर रहे कंप्यूटर सहायकों की लॉग-इन आईडी निष्क्रिय किए जाने के बाद संबंधित ईआरओ से इसकी पुष्टि प्राप्त कर लें। यह कार्रवाई विधानसभा क्षेत्र 127-पीलीभीत में 10,470 मतदाता प्रविष्टियों में कथित अनियमितताओं की जांच के बाद की गई है। जांच में पाया गया कि एक कंप्यूटर सहायक ने ईसीआईनेट पोर्टल पर लॉग-इन आईडी का कथित तौर पर दुरुपयोग किया और 31 मई से 29 अगस्त के बीच मतदाता विवरण में बदलाव के लिए 13,779 ‘फॉर्म-8’ आवेदन दर्ज किए। इनमें से 10,470 आवेदनों को मंजूरी दे दी गई, जबकि 3,309 को खारिज कर दिया गया। हालांकि, कार्यालय में इन प्रविष्टियों से संबंधित कोई आवेदन पत्र या सहायक दस्तावेज नहीं मिले।

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