दिल्ली : 'हताश' भाजपा हर जगह सत्ता बचाने के लिए किसी भी हद तक जा रही है : राहुल गांधी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

गुरुवार, 5 नवंबर 2026

दिल्ली : 'हताश' भाजपा हर जगह सत्ता बचाने के लिए किसी भी हद तक जा रही है : राहुल गांधी

rahul-gandhi-attack-modi
नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के गोकुल दूध महासंघ के चुनाव में निर्वाचित बोर्ड के बहुमत को कथित तौर पर प्रभावित करने की कोशिश को लेकर बृहस्पतिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा और कहा कि भाजपा इतनी हताश हो चुकी है कि हर जगह सत्ता बचाने के लिए किसी भी हद तक जा रही है। राहुल गांधी ने कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा की एक पोस्ट को ‘एक्स’ पर रिपोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव के बाद नियम बदलकर दुग्ध उत्पादकों के जनादेश में मिलावट करने की कोशिश कर रही है। 


उन्होंने कहा, ‘‘तो भाजपा ने चुनाव के बाद नियम बदल दिए, चार निदेशक थोपो, 12 को 16 बनाओ और बहुमत चुरा लो। यह दूध उत्पादकों के वोट की चोरी है- जनादेश में मिलावट।’’ राहुल गांधी ने कहा, ‘‘भाजपा इतनी हताश हो चुकी है कि हर जगह सत्ता बचाने के लिए किसी भी हद तक जा रही है। दूध उत्पादकों का वोट चुराने वाले याद रखें, किसान भूलता नहीं।’’ इससे पहले, पवन खेड़ा ने बुधवार को आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र सरकार गोकुल दूध महासंघ के निर्वाचित बोर्ड की संरचना में बदलाव करने के लिए विधायी संशोधनों का सहारा लेकर दूध उत्पादकों के लोकतांत्रिक जनादेश को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। खेड़ा के अनुसार, 19 अक्टूबर को हुए चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले पैनल ने 25 में से 13 सीटें जीतकर महायुति समर्थित पैनल की 12 सीटों के मुकाबले बहुमत हासिल किया था। उन्होंने दावा किया कि महायुति समर्थित निदेशकों के अनुपस्थित रहने के कारण अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो सका, जिसके बाद बंबई उच्च न्यायालय ने 10 नवंबर को नए सिरे से चुनाव कराने का निर्देश दिया। खेड़ा ने आरोप लगाया था कि निर्वाचित बोर्ड को काम करने देने के बजाय राज्य मंत्रिमंडल ने मतदान के अधिकार वाले चार सरकारी निदेशकों को नामित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इससे बोर्ड में बहुमत का गणित बदल सकता है और दूध उत्पादकों के जनादेश को पलटा जा सकता है। उन्होंने कहा था कि इस फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी जा रही है, ताकि लोकतांत्रिक जनादेश और सहकारी संस्थाओं की स्वायत्तता की रक्षा की जा सके।a

कोई टिप्पणी नहीं: