मेहता ने इस अनुरोध का विरोध करते हुए कहा कि गोवा सरकार इसका विरोध करेगी। उच्चतम न्यायालय ने इससे पहले 2013 के दुष्कर्म मामले में तेजपाल की सजा को लेकर दो नोटिस जारी किए थे। इनमें से एक नोटिस पत्रकार की 10 साल की जेल की सजा को चुनौती देने वाली याचिका पर गोवा पुलिस को और दूसरा सजा बढ़ाने का अनुरोध करने वाली गोवा सरकार की याचिका पर तेजपाल को जारी किया गया था। बंबई उच्च न्यायालय ने छह अगस्त को तेजपाल को दुष्कर्म का दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले के साथ ही उच्च न्यायालय ने पांच साल पहले निचली अदालत द्वारा तहलका पत्रिका के पूर्व संपादक को बरी किए जाने के फैसले को पलट दिया था। वर्ष 2013 में गोवा में पत्रिका की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान होटल की लिफ्ट में अपनी एक कनिष्ठ सहकर्मी से दुष्कर्म करने के मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया था। इससे पहले, 62 वर्षीय पत्रकार ने दावा किया था कि वह राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार हुए हैं।
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने 2013 के दुष्कर्म मामले में पत्रकार तरुण तेजपाल को बंबई उच्च न्यायालय द्वारा 10 साल जेल की सजा सुनाए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई मंगलवार को पांच नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी। न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किए जाने के बाद मामले को टाल दिया। तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत से अनुरोध किया कि तेजपाल को दिवाली के दौरान घर आने की अनुमति दी जाए। सिब्बल ने कहा, ‘‘अगर वह (सरकार) समय लेना चाहती है, तो ले सकती है। लेकिन तेजपाल को दिवाली के दौरान बाहर आने दिया जाए।’’

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