मुकेश अंबानी ने उर्जा के क्षेत्र में कदम बढाने की घोषणा की !! - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 18 जून 2010

मुकेश अंबानी ने उर्जा के क्षेत्र में कदम बढाने की घोषणा की !!


रिलायंस इंडस्ट्रीज की 36वीं वार्षिक आम बैठक में कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डयरेक्टर मुकेश अंबानी ने उर्जा के क्षेत्र में कदम बढाने की घोषणा की है . इस कदम को बड़े बदलाव लाने वाला कदम बताया.
उन्होंने कहा, “रिलायंस इंडस्ट्रीज़ और एडीएजी (अनिल अंबानी की कंपनी) ने दोनों कंपनियों की प्रतिस्पर्धा को रोकने वाले पुराने समझौते को रद्द करके एक नए गैर-प्रतिस्पर्धा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. इससे रिलायंस के लिए ऊर्जा के एक नए व्यापार में आने के दरवाज़े खुल गए हैं, सिर्फ़ नॉन-कैप्टिप गैस पर आधारित प्लांट को वर्ष 2022 तक छोड़ कर. इस कदम से रिलायंस के ऊर्जा के उत्पादन और उसे लोगों तक पहुँचाने के दरवाज़े खुल गए हैं.”
मुकेश अंबानी ने कहा कि एक अरब से ज़्यादा वाले भारत में ऊर्जा की मांग बढ़ गई है और उनकी कंपनी कोयला और पानी से बिजली बनाने के लिए नई परियोजनाओं के पूँजी निवेश पर विचार कर ही रही है.
उन्होंने कहा कि जब भी आणविक ऊर्जा के लिए निजी क्षेत्र के दरवाज़े खुलते हैं, तो उसके लिए भी परियोजनाओं पर विचार किया जा रहा है.
इससे पहले मुकेश अंबानी ने अपनी कंपनी और अनिल अंबानी की कंपनी एडीएजी के बीच तेल की कीमतों पर पहले चल रहे झगड़े पर उच्चतम न्यायालय के फ़ैसले पर बात की.
उन्होंने कहा, “उच्चतम न्यायालय ने ज़्यादातर बातों में रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के पक्ष का समर्थन किया. हम इस बात से पूरे तौर पर वाकिफ़ हैं कि भारत सरकार का तेल व्यापार की पूरी गतिविधि में महत्वपूर्ण भूमिका है. जब भी एडीएजी के ऊर्जा-आधारित संयंत्र बनकर तैयार हो जाएंगे, हम उन्हें गैस की आपूर्ति शुरू कर देंगे. लेकिन ये इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार इस संयंत्र को कितनी गैस देने की इजाज़त देती है.
मुकेश अंबानी का कहना था, "ये बिल्कुल उसी तरह है जिस तरह हम दूसरे संयंत्रों को केजी-6 गैसफ़ील्ड से गैस देते हैं. अब जबकि दोनों कंपनियों के बीच कानूनी अड़चनें खत्म हो गई हैं, हम एडीएजी ग्रुप के साथ एक रचनात्मक संबंध की उम्मीद करते हैं.”
कुछ दिन पहले अंबानी बंधुओं ने अपने मतभेद भुलाकर एक दूसरे के साथ सौहार्द और सहयोग के माहौल में काम करने का फ़ैसला किया था.
मुकेश और अनिल अंबानी के बीच एक दूसरे के व्यापार के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं करने के लिए 2006 में हुए सभी समझौतों को ख़त्म करने का समझौता किया है.
दरअसल कुछ समय पहले प्राकृतिक गैस के मूल्य निर्धारण को लेकर अंबानी बंधुओं में चल रही खींचतान पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फ़ैसला सुनाया था जिसमें कहा गया कि गैस का मूल्य तय करने का अधिकार सिर्फ़ सरकार के पास है.
अदालत के इस निर्णय को मुकेश अंबानी के हक़ में माना गया क्योंकि सरकार जो भी मूल्य निर्धारित करेगी वह दोनों भाइयों के बीच हुए एक पारिवारिक समझौते से काफ़ी अधिक होगा.
अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज़ का मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज़ से गैस ख़रीदने के लिए एक पारिवारिक समझौता हुआ था.
उस समझौते के मुताबिक अनिल अंबानी की कंपनी को मुकेश अंबानी की कंपनी से 2.34 डॉलर प्रति मिलियन यूनिट के हिसाब से 17 साल तक प्राकृतिक गैस उपलब्ध करवाई जानी थी.
ये मूल्य 4.20 डॉलर प्रति मिलियन यूनिट से काफ़ी कम था, जिसे सरकार ने वर्ष 2006 में निर्धारित किया था.
रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज़ के मालिक अनिल अंबानी ने सरकारी मूल्य को मानने से ये कहते हुए इनकार कर दिया था कि उनका गैस के मूल्य को लेकर एक पारिवारिक समझौता है और वो उसी का पालन करेंगे.
अदालत ने अपने निर्णय में कहा था कि ये पारिवारिक समझौता तकनीकी और क़ानूनी तौर पर रिलायंस इंडस्ट्रीज़ को बाध्य नहीं करता.
अदालत ने दोनों भाइयों से कहा था कि वे दोबारा बातचीत करके किसी समझौते पर पहुँचें जिसके बाद दोनों के बीच नया समझौता हुआ.

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