नीरू ने की थी आत्महत्या, पुष्टि की एम्स ने. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 24 अगस्त 2010

नीरू ने की थी आत्महत्या, पुष्टि की एम्स ने.

बहुचर्चित निरुपमा पाठक की मौत से रहस्य का पर्दा अब पूरी तरह उठ चुका है। विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली में निरुपमा के विवादस्पद पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर राय के लिए गठित विशेषज्ञों की बोर्ड ने मौत का कारण 'एस्फैक्सिया बाई हैंगिंग' बताया है। रिपोर्ट से साफ है कि निरुपमा ने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी। बोर्ड की बैठक गत 9 अगस्त को दिल्ली में हुई थी। इसमें निरुपमा का पोस्टमार्टम करनेवाले मेडिकल बोर्ड में शामिल तीनों चिकित्सकों डा. शिवकुमार, डा. केपी सिंह और डा. आशीष कुमार को बोर्ड ने पूछताछ के लिए दिल्ली तलब किया था।

इससे पहले भी फारेंसिक साइंस लैबोरेटरी , रांची की रिपोर्ट से भी मामला आत्महत्या के रूप में सामने आया था। निरुपमा के गले का फांस बनी दुपट्टा, उसके तकिया का कवर, बेडशीट और तोशक के कवर की फारेंसिक जांच की गई। जिसमें दुपट्टा में तो स्लाइवा के अंश पाए गए थे, जबकि बेडशीट, तोशक और तकिया कवर में लार के अंश नहीं पाए गए थे। वहीं निरुपमा द्वारा मौत के वक्त छोड़े गए सुसाइड नोट की कोलकाता लैबोरेटरी में हुई फोरेंसिक जांच में भी हैंडराइटिंग निरुपमा की ही होने की पुष्टि की गई है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली के एक दैनिक अखबार की पत्रकार झुमरीतिलैया चित्रगुप्त नगर निवासी बैंक अधिकारी धमर्ेंद्र पाठक की पुत्री निरुपमा पाठक की मौत गत 29 अप्रैल को उसके झुमरीतिलैया स्थित आवास में संदिग्ध परिस्थतियों में हो गई थी। घटना को लेकर दिल्ली के एक समाचार एजेंसी में कार्यरत उसके कथित प्रेमी प्रियभांशु रंजन ने परिजनों पर हत्या का आरोप लगाया था। दिल्ली के कुछ पत्रकारों ने जिले के डीसी एवं एसपी को एक फैक्स भेजकर निरुपमा के शव का पोस्टमार्टम मेडिकल बोर्ड से कराने की मांग की थी। इसके बाद कोडरमा सदर अस्पताल में सिविल सर्जन के निर्देश पर गठित तीन सदस्य मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम कराया गया। उक्त पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण 'स्मूदरिंग' बताया गया था। इसके बाद करीब एक माह तक यह मामला 'आनर कीलिंग' के रूप में मीडिया की सुर्खियों में बना रहा। मामले में संदेह के आधार पर निरुपमा की मां सुधा पाठक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था जो तीन माह बाद गत सप्ताह जमानत पर रिहा हुईं। इधर, कोडरमा अस्पताल में मेडिकल बोर्ड द्वारा किये गए पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कई खामियां पाई गई थी। जिसके कारण जिले के एसपी जी। क्रांति कुमार ने राज्य सरकार के गृह विभाग के माध्यम से एम्स के फारेंसिक विभाग से पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर राय मांगी थी।


इनपुट :- जागरण

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