पद्म विभूषण से सम्मानित और 18 भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गीत गा चुकीं आशा भोसले का सुरों का सफर अब भी जारी है। प्रख्यात पार्श्व गायिका आशा ताई आज अपना 78वां जन्मदिन मना रही हैं। वह आज भी बॉलीवुड में मजबूत स्थिति में हैं और उनके ढेरों प्रशंसक हैं।
फिल्मोद्योग में छह दशक गुजारने के बावजूद आज भी उनकी आवाज में पहले जैसी ही ताजगी और खनक है। बहुत कम उम्र में ही अपनी गायकी का करियर शुरू करने वाली आशा ताई ने अलग-अलग तरह के गीत गाए हैं। हिंदी फिल्मोद्योग की मशहूर डांसर हेलन के लिए कई गीतों को आवाज देने के बाद उन्हें कैबरे गायिका कहा जाने लगा था।
बाद में 1957 में आई दिलीप कुमार-वैजंतीमाला अभिनीत फिल्म ‘नया दौर’ के ‘मांग के साथ तुम्हारा’ गीत ने उनकी कैबरे गायिका की छवि को तोड़ उन्हें बहुमुखी प्रतिभा वाली एक गायिका के रूप में स्थापित किया।
इसके बाद उन्होंने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा। प्रख्यात संगीतकार ओंकार प्रसाद नैयर (ओ. पी. नैयर) के संगीत निर्देशन में आशा ताई ने हिंदी सिनेमा को अविस्मरणीय गीतों का उपहार दिया। फिल्म ‘मेरे सनम’ का गाना ‘जाइए आप कहां जाएंगे’, इसी फिल्म का एक और गीत ‘ये है रेशमी जुल्फों का अंधेरा’, मो. रफी के साथ फिल्म ‘फागुन’ का युगल गीत ‘एक परदेशी मेरा दिल ले गया’, इसी फिल्म का एक और गाना ‘पिया पिया ना लागे मोरा जिया’, फिल्म ‘हावड़ा ब्रिज’ का ‘आइए मेहरबान’ जैसे न जाने कितने गीत आशा ताई ने ओ. पी. नैयर के संगीत निर्देशन में गाए, जो आज भी संगीत प्रेमियों की जुबान पर हैं।
ओ. पी. नैयर के अलावा उन्होंने रवि, खय्याम, शंकर जयकिशन और आर. डी. बर्मन जैसे प्रख्यात संगीतकारों के साथ काम किया। बर्मन ने, जो बाद में उनके पति भी बने, उन्हें उनकी बड़ी बहन व मशहूर गायिका लता मंगेशकर की छांव से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आशा ताई ने बर्मन के साथ ‘दम मारो दम’ (हरे रामा, हरे कृष्णा), ‘मेरा कुछ सामान’ (इजाजत), ‘पिया तू अब तो आजा’ (कारवां) और ‘चुरा लिया है तुमने’ (यादों की बारात) जैसे सुरीले गीत दिए।
आशा कहती हैं, ‘पंचम (बर्मन) में यह अनूठा गुण था कि वह प्रत्येक कलाकार को सहज बना उससे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करा लेते थे। वह जानते थे कि मैं गाने को किस तरह से अधिक असरदार बना सकती हूं।’
जब 80 के दशक में खैयाम के निर्देशन में ‘उमराव जान’ में उनके ‘दिल चीज क्या है’, ‘इन आंखों की मस्ती’ और ‘ये क्या जगह है दोस्तों’ जैसे गीतों से उन्होंने अपनी गजल गायकी का बेहतरीन नमूना पेश किया। रोमांटिक गीत हो, मादकता भरे गीत हो, मुजरा हो या गजल हो, आशा ताई ने अपनी अद्भुत गायकी से सबमें जान डाल दी। यही वजह है कि 77 साल की उम्र में भी उनका फिल्मी तरानों का सफर जारी है।
आशा ने असमिया, बांग्ला, गुजराती, हिंदी, मलयालम, मराठी, पंजाबी, तमिल, तेलुगू, उर्दू, अंग्रेजी, रूसी, चेक, नेपाली और मलय सहित 18 भाषाओं में गीत गाए हैं।
फिल्मोद्योग में छह दशक गुजारने के बावजूद आज भी उनकी आवाज में पहले जैसी ही ताजगी और खनक है। बहुत कम उम्र में ही अपनी गायकी का करियर शुरू करने वाली आशा ताई ने अलग-अलग तरह के गीत गाए हैं। हिंदी फिल्मोद्योग की मशहूर डांसर हेलन के लिए कई गीतों को आवाज देने के बाद उन्हें कैबरे गायिका कहा जाने लगा था।
बाद में 1957 में आई दिलीप कुमार-वैजंतीमाला अभिनीत फिल्म ‘नया दौर’ के ‘मांग के साथ तुम्हारा’ गीत ने उनकी कैबरे गायिका की छवि को तोड़ उन्हें बहुमुखी प्रतिभा वाली एक गायिका के रूप में स्थापित किया।
इसके बाद उन्होंने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा। प्रख्यात संगीतकार ओंकार प्रसाद नैयर (ओ. पी. नैयर) के संगीत निर्देशन में आशा ताई ने हिंदी सिनेमा को अविस्मरणीय गीतों का उपहार दिया। फिल्म ‘मेरे सनम’ का गाना ‘जाइए आप कहां जाएंगे’, इसी फिल्म का एक और गीत ‘ये है रेशमी जुल्फों का अंधेरा’, मो. रफी के साथ फिल्म ‘फागुन’ का युगल गीत ‘एक परदेशी मेरा दिल ले गया’, इसी फिल्म का एक और गाना ‘पिया पिया ना लागे मोरा जिया’, फिल्म ‘हावड़ा ब्रिज’ का ‘आइए मेहरबान’ जैसे न जाने कितने गीत आशा ताई ने ओ. पी. नैयर के संगीत निर्देशन में गाए, जो आज भी संगीत प्रेमियों की जुबान पर हैं।
ओ. पी. नैयर के अलावा उन्होंने रवि, खय्याम, शंकर जयकिशन और आर. डी. बर्मन जैसे प्रख्यात संगीतकारों के साथ काम किया। बर्मन ने, जो बाद में उनके पति भी बने, उन्हें उनकी बड़ी बहन व मशहूर गायिका लता मंगेशकर की छांव से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आशा ताई ने बर्मन के साथ ‘दम मारो दम’ (हरे रामा, हरे कृष्णा), ‘मेरा कुछ सामान’ (इजाजत), ‘पिया तू अब तो आजा’ (कारवां) और ‘चुरा लिया है तुमने’ (यादों की बारात) जैसे सुरीले गीत दिए।
आशा कहती हैं, ‘पंचम (बर्मन) में यह अनूठा गुण था कि वह प्रत्येक कलाकार को सहज बना उससे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करा लेते थे। वह जानते थे कि मैं गाने को किस तरह से अधिक असरदार बना सकती हूं।’
जब 80 के दशक में खैयाम के निर्देशन में ‘उमराव जान’ में उनके ‘दिल चीज क्या है’, ‘इन आंखों की मस्ती’ और ‘ये क्या जगह है दोस्तों’ जैसे गीतों से उन्होंने अपनी गजल गायकी का बेहतरीन नमूना पेश किया। रोमांटिक गीत हो, मादकता भरे गीत हो, मुजरा हो या गजल हो, आशा ताई ने अपनी अद्भुत गायकी से सबमें जान डाल दी। यही वजह है कि 77 साल की उम्र में भी उनका फिल्मी तरानों का सफर जारी है।
आशा ने असमिया, बांग्ला, गुजराती, हिंदी, मलयालम, मराठी, पंजाबी, तमिल, तेलुगू, उर्दू, अंग्रेजी, रूसी, चेक, नेपाली और मलय सहित 18 भाषाओं में गीत गाए हैं।

1 टिप्पणी:
आशा जी को जन्म दिन की बहुत बधाई एवं शुभकामनाएँ.
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