अधिकारिक सूत्रों के अनुसार तटबंध मरम्मत कार्य के बावजूद जब तटबंध का कटाव नहीं रुका तो प्रशासन ने तटबंध मरम्मत का कार्य रोक दिया है। आशंका है कि रात में तटबंध कभी भी टूट सकता है।
आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव व्यास जी ने बुधवार की रात को बताया कि तटबंध मरम्मत का कार्य रोक दिया गया है तथा प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य प्रारंभ कर दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आपदा सुदृढ़ीकरण बल (एनडीआरएफ) की पांच टुकड़ियां गोपालगंज में तथा दो टुकड़ियां छपरा और एक टुकड़ी सीवान जिला में मोटरवोट के साथ किसी भी स्थिति से निपटने को तैयार हैं।
उन्होंने बताया कि प्रभावित होने वाले क्षेत्रों से लोगों को हटाया जा रहा है। इनके लिए कैम्प लगाए गए हैं, जिसमें लोगों के रहने की सुविधा मुहैया कराई गई है। पशुओं के लिए भी व्यवस्था की गई है। व्यास जी के मुताबिक इन क्षेत्रों में 1,500 तम्बू भी भेजे गए हैं।
इसके पूर्व तटबंध को बचाने के उपाय किए जा गए परंतु वह कारगर सिद्घ नहीं हुए। प्रभावित होने वाले इलाकों को अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
तटबंध टूटने की स्थिति में पांच लाख से ज्यादा की आबादी बाढ़ की चपेट में आ सकती है।
इसके पूर्व तटबंध को बचाने के उपाय किए जा गए परंतु वह कारगर सिद्घ नहीं हुए। प्रभावित होने वाले इलाकों को अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
तटबंध टूटने की स्थिति में पांच लाख से ज्यादा की आबादी बाढ़ की चपेट में आ सकती है।
गोपालगंज के जिलाधिकारी बालामुरूगन ने बुधवार को बताया कि बरौली प्रखंड के सेमरिया गांव के समीप गंडक नदी द्वारा हो रहे कटाव को रोकने का प्रयास किया गया परंतु कटाव जारी है।
एहतियात के तौर पर राष्ट्रीय आपदा सुदृढ़ीकरण बल (एनडीआरएफ) की आठ टुकड़ियां जिला में पहुंच गई हैं तथा दस मोटरवोट भी मंगाया गया है। उन्होंने बताया कि कटाव स्थल पर अधिकारियों का दल चौबीस घंटे निगरानी कर रहा है।
व्यास जी ने बताया कि तटबंध टूटने के बाद उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए विभाग मुस्तैद है। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए गोपालगंज, सीवान तथा छपरा के जिलाधिकारियों को सतर्क कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि गोपालगंज से 40 किलोमीटर दूर सारण तटबंध पर गंडक नदी का दबाव बढ़ गया है जो कभी भी टूट सकता है। तटबंध बचाने के लिए बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अभियंताओं को लगाया गया है।
एहतियात के तौर पर राष्ट्रीय आपदा सुदृढ़ीकरण बल (एनडीआरएफ) की आठ टुकड़ियां जिला में पहुंच गई हैं तथा दस मोटरवोट भी मंगाया गया है। उन्होंने बताया कि कटाव स्थल पर अधिकारियों का दल चौबीस घंटे निगरानी कर रहा है।
व्यास जी ने बताया कि तटबंध टूटने के बाद उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए विभाग मुस्तैद है। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए गोपालगंज, सीवान तथा छपरा के जिलाधिकारियों को सतर्क कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि गोपालगंज से 40 किलोमीटर दूर सारण तटबंध पर गंडक नदी का दबाव बढ़ गया है जो कभी भी टूट सकता है। तटबंध बचाने के लिए बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अभियंताओं को लगाया गया है।
उन्होंने बताया कि तटबंध पर नदी के जलस्तर का दबाव काफी ज्यादा है जिसके कारण स्थिति भयानक बनी हुई है।
अधिकारिक सूत्रों के अनुसार तटबंध टूटने के बाद गोपालगंज जिले के सिंधवलिया, बरौली और बैकुंठपुर प्रखंड के दस पंचायत पूरी तरह पानी में डूब जाएंगे। इन पंचायतों के नीचे के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को घर से निकलने का कार्य किया जा रहा है।
इसके अलावा सीवान जिले के गोरियाकोठी, बसंतपुर तथा छपरा जिला के मशरख और बनियापुर प्रखंड में भी स्थिति भयावह हो जाएगी। यहां भी प्रशासन द्वारा प्रचार कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।
अधिकारिक सूत्रों के अनुसार तटबंध टूटने के बाद गोपालगंज जिले के सिंधवलिया, बरौली और बैकुंठपुर प्रखंड के दस पंचायत पूरी तरह पानी में डूब जाएंगे। इन पंचायतों के नीचे के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को घर से निकलने का कार्य किया जा रहा है।
इसके अलावा सीवान जिले के गोरियाकोठी, बसंतपुर तथा छपरा जिला के मशरख और बनियापुर प्रखंड में भी स्थिति भयावह हो जाएगी। यहां भी प्रशासन द्वारा प्रचार कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।

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