वह ईश्वर ही है जो सर्वत्र व्याप्त है औरसभी प्राणियों के ह्रदय में विराजमान है|केवल वही शासक और निर्देशक है|उसके अतिरिक्त और कौन है जो किसी कोनिर्देश दे या बांध कर रख सके|
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