तुम अपने मित्रों के साथ बिना दोषारोपण किये स्वतन्त्रतापूर्वक
बातें कर सकते हो| लेकिन जब तक एक दूसरे से अपेक्षाए जुडी हैं,
मित्रता कभी भी विकसित नहीं हो सकती| मित्रता के लिए स्वतंत्रता
और आध्यात्मिक समानता आवश्यक है इसलिए तुम प्रत्येक के साथ
उस दैवीय प्रकाश की चेतना के साथ व्यवहार करो कि प्रत्येक व्यक्ति
ईश्वर का ही रूप है| यदि तुम किसी के भी साथ गलत व्यवहार
करते हो, तुम्हारी उसके साथ मित्रता नहीं हो सकती|
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें