जम्मू एवं कश्मीर के लिए केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त वार्ताकार दिलीप पडगांवकर दो अन्य वार्ताकारों के साथ शनिवार को यहां पहुंच गए। उन्होंने कहा कि समिति समस्या के स्थायी समाधान की पहल करेगी, लेकिन यह समाधान पाकिस्तान की भागीदारी के बिना संभव नहीं होगा।प्रसिद्ध पत्रकार पडगांवकर ने पत्रकारों को बताया, "हम लोग कश्मीर विवाद के स्थायी समाधान की तलाश के लिए यहां आए हैं, लेकिन इस विवाद का स्थायी समाधान पाकिस्तान के शामिल हुए बगैर संभव नहीं है।" उन्होंने कहा कि वार्ताकारों के दौरे का मुख्य लक्ष्य युवकों से बातचीत करना है। वे युवकों के साथ तय समय (15 मिनट) से भी ज्यादा समय तक बात करेंगे। केन्द्र सरकार की ओर से नियुक्त तीनों वार्ताकार पडगांवकर, शिक्षाविद राधा कुमार और सूचना आयुक्त एमएम अंसारी कश्मीर घाटी में वार्ता के लिए शनिवार अपरान्ह पहुंचे। वार्ताकार नियुक्त होने के बाद इनकी यह पहली कश्मीर यात्रा है।
हुर्रियत के दोनों नरमपंथी और कट्टरपंथी धड़े के नेताओं सैयद अली शाह गिलानी और मीरवाइज उमर फारूक ने पहले ही ऐलान कर दिया है कि वे इन वार्ताकारों से मुलाकात नहीं करेंगे। इसके साथ ही इन लोगों ने स्थानीय कारोबारियों और छात्र संगठनों का भी आह्वान किया है कि वे इन वार्ताकारों से न मिलें। मुख्य वार्ताकार पडगांवकर ने उम्मीद जताई कि वे सभी बाधाओं को खत्म कर घाटी के हर तबके से मिल सकेंगे। उन्होंने कहा, "हमारे साथ प्रोटोकाल की कोई समस्या नहीं है। जो लोग हमसे मिलने नहीं आएंगे, हम उनके दरवाजे तक जाएंगे।" तीनों वार्ताकारों ने गुरुवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की थी। इनके अनुसार प्रधानमंत्री ने तीनों से कहा कि वे कश्मीर की मौजूदा स्थिति को देखते हुए राजनीतिक समाधान की पहल करें और युवाओं व महिलाओं से ज्यादा बात करने की कोशिश करें।
1 टिप्पणी:
कोई आश्चर्य नहीं हुआ. इन से ये उम्मीद थी..
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