अरूंधति राय के खिलाफ मामला दर्ज न करने पर केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि ‘मामला दर्ज न करना भी एक कार्रवाई है।’ उन्होंने कहा कि देशविरोधी बयान के मद्देनजर मौजूद कानूनी धारा की भावना समझनी होगी। उन्होंने कहा कि यह धारा कहती है कि ऐसा करने वाले व्यक्ति के खिलाफ उचित प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। ऐसे में मुकदमा दर्ज न करना भी एक कार्रवाई है। चिदंबरम ने कहा कि अरूंधति राय के खिलाफ पुलिस को कार्रवाई करनी है जबकि एएस गिलानी के खिलाफ दिल्ली पुलिस कार्रवाई को लेकर अपना कार्य कर रही है।श्री चिदंबरम ने कहा कि राय के खिलाफ मामला दर्ज न करके असल में सरकार अरुंधती की उस इच्छा के खिलाफ कदम बढ़ा रही है, जिसमें वह गिरफ्तार होकर देश-दुनिया में प्रचार पाना चाहती है। चिदंबरम ने एक सवाल के जवाब में कहा कि अरूंधति राय के घर पर हमले के मामले की जांच पुलिस कर रही है। अगर यह पाया जाता है कि उन्हें किसी तरह की सुरक्षा की जरूरत है तो इस पर त्वरित आधार पर निर्णय किया जाएगा।
भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने ‘मानवाधिकार आंदोलन गलत धारणा को सुधारना’ नामक संगोष्ठी में राय का नाम लिए बिना कहा कि ‘बड़े पुरस्कार पाने वाले आतंकवादियों और अलगाववादियों का समर्थन करते हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर आतंकवादियों के मानवाधिकार की बात करते हैं। इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है।’ गडकरी ने कहा, ‘आतंकवादी और अलगाववादी देश को तोड़ना चाहते हैं। उन्हें काहे का मानवाधिकार संरक्षण।’ उल्लेखनीय है कि अरूंधित राय ने हाल ही में कहा था कि आतंकवादियों व अलगाववादियों का भी मानवाधिकार है।
कश्मीर वार्ताकारों के गाहे-बगाहे बयानों के प्रति अपनी नाखुशी जाहिर करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने उन्हें जुबान पर अंकुश रखने की सलाह दी है। वार्ताकारों के कुछ बयानों पर गृह मंत्रालय को आलोचना झेलनी पड़ रही हैं। इसी चिंता को सार्वजनिक करते हुए पी चिदंबरम ने वार्ताकारों के बयानों को ‘क्रिकेट कमेंट्री’ से तुलना करते हुए कहा, ‘वार्ताकारों को चाहिए कि वे बिंदुवार जानकारी न दें। यह क्रिकेट कमेंट्री नहीं है। उन्हें यह समझना चाहिए कि वे अहम वार्ताकार हैं।’ चिदंबरम ने उन्हें सलाह दी है कि वे क्रिकेट कमेंट्री की तरह हर बिंदु पर बयान न दें।
चिदंबरम का यह बयान उस समय आया है जब जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी वार्ताकारों को हद लांघने की शिकायत की है। चिदंबरम ने अपने मंत्रालय की अक्टूबर महीने की मासिक रपट जारी करते हुए कहा, ‘कश्मीर में स्थिति सामान्य हुई है। लेकिन यह कहना कि स्थिति पूरी तरह सामान्य हो गई है, थोड़ी जल्दबाजी होगी।’ उन्होंने कहा कि वार्ताकार समूह के गठन के बाद लोगों में यह उम्मीद जगी है कि समस्या का राजनीतिक हल सामने आएगा। खासकर सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के कश्मीर दौरे के वक्त ही लोग किसी राजनीतिक हल के प्रति आशान्वित हो गए थे। चिदंबरम ने कहा, ‘हर चीज समय से होती है।इस प्रक्रिया का भी समय के साथ हल सामने आएगा।’ उन्होंने मीडिया को भी सलाह देते हुए कहा, ‘हर वक्त आड़े-तिरछे सवाल करना अच्छी पत्रकारिता नहीं है। इसी तरह एक नेता के बयान पर दूसरे नेता का बयान देना भी अच्छी राजनीति नहीं है।’ चिदंबरम ने इसके साथ ही भाजपा पर भी हमला किया। उन्होंने कहा कि वार्ताकार समूह को काम करने के लिए समय देना होगा। अगर वे (भाजपा)चाहते हैं कि समस्या का हल सामने आए तो बिना तथ्य के विरोध न करें।
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