सोनिया ने विपक्ष पर नाराजगी जताई. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

सोमवार, 20 दिसंबर 2010

सोनिया ने विपक्ष पर नाराजगी जताई.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और अन्य नेताओं ने रविवार को शुरू हुए पार्टी के दिल्ली महाअधिवेशन में एक साथ कई संदेश देने के प्रयास किए हैं। स्वयं सोनिया गांधी ने विपक्ष पर सीधा हमला किया और टेलीकॉम घोटाले के चलते संसद न चलने देने पर उन्होंने अपनी नाराजगी प्रकट की। उन्होंने भ्रष्टाचार पर भी काफी तीखे तेवर दिखाए और धार्मिक आतंकवाद को भी निशाना बनाया।

पार्टी के 125वें वर्ष में हो रहे इस 83वें अधिवेशन के पहले से ही देश का राजनीतिक वातावरण काफी गरमा चुका है। राजा का टेलीकॉम घोटाला, पत्रकारों, नेताओं व उद्योगपतियों के साथ नीरा राडिया की टेलीफोन वार्ताओं के चुनिंदा टेप, बिहार चुनाव में कांग्रेस को मिली बड़ी हार और विकीलिक्स के खुलासों के चलते देश एक अजीब माहौल से गुजर रहा प्रतीत होता है। कांग्रेस पार्टी का इस सबसे अछूता रहना कठिन है। इसी दौरान प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह भी विपक्ष के आक्रमण के दायरे में आए हैं।

जनता ने उनकी ‘मिस्टर क्लीन’ छवि पर प्रश्नचिह्न् लगाना शुरू कर दिया है। इस पाश्र्वभूमि में सोनिया गांधी द्वारा भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाना बड़ी रणनीति का भाग दिखता है। उन्होंने इस संबंध में कर्नाटक का नाम लेकर भाजपा से पूछा कि कैसे भाजपा भ्रष्टाचार के मुद्दे पर दोमुंही बातें कर सकती है। निश्चित ही कांग्रेस पर जो भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं, उससे वे जनता का ध्यान दूसरी तरफ ले जाना चाहती हैं।

यद्यपि दूसरे पार्टी नेताओं ने भाजपा और संघ को हिंदू आतंकवाद से जोड़ने का प्रयास किया, लेकिन स्वयं कांग्रेस अध्यक्ष ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का नामोल्लेख नहीं करने की सावधानी बरती। सांप्रदायिकता पर उनका यह कहना कि कांग्रेस बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक दोनों समुदाय के कुछ लोगों द्वारा फैलाए जाने वाले आतंकवाद के खिलाफ है, महत्वपूर्ण है। यह इसलिए कि पिछले कई दिनों से कांग्रेस के बड़े नेता जिस तरह से लगातार भाजपा और संघ को हिंदू आतंकवाद से सीधे जोड़ रहे थे उससे लग रहा था कि कांग्रेस अल्पसंख्यकों के तुष्टीकरण में लगी है, खासकर उत्तरप्रदेश के चुनावों को ध्यान में रखकर।

दोनों प्रमुख पार्टियों के बीच इस शाब्दिक राजनीतिक लड़ाई में देश का शांत सामाजिक माहौल बिगड़ने का डर हो सकता है। जिस तरह अयोध्या फैसले के बाद पूरा देश शांत रहा, वैसे ही सांप्रदायिक सौहार्द की आज आवश्यकता है। साथ ही नेताओं को भी अपनी परिपक्वता दिखाने की जरूरत है।

कोई टिप्पणी नहीं: