रूस की पहल पर सुरक्षा परिषद की ये बैठक बुलाई गई थी. हालाँकि रूस का कहना है कि इस बैठक को पूरी तरह समय की बर्बादी कहना उचित नहीं.
रूस चाहता था कि संयुक्त राष्ट्र दोनों देशों को संयम बरतने का संदेश भेजे. दक्षिण कोरिया ने कहा है कि वह उत्तर कोरिया की चेतावनी के बावजूद सीमावर्ती इलाक़े में सैनिक अभ्यास करेगा. उत्तर कोरिया ने कहा था कि इस अभ्यास के नतीजे ख़तरनाक हो सकते हैं. इस मामले पर बुलाई गई सुरक्षा परिषद की बैठक आठ घंटे से भी ज़्यादा समय तक चली.
संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत सुज़ैन राइस ने बताया कि सुरक्षा परिषद की बैठक में सदस्य देशों के बीच इतने गहरे मतभेद थे कि इसे दूर करना मुश्किल था. बयान में कैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाए, इसको लेकर काफ़ी मतभेद थे. रूस और चीन दोनों पक्षों से अपील करना चाहते थे कि वे ज़्यादा से ज़्यादा संयम बरतें.
लेकिन अमरीका की अगुआई में ज़्यादातर सदस्य देश ये चाहते थे कि उत्तर कोरिया की और निंदा की जाए. कोरियाई प्रायद्वीप में हाल के तनाव के लिए उत्तर कोरिया को ही ज़िम्मेदार माना जा रहा है. रूसी राजदूत विताली चुर्किन के मुताबिक़ सुरक्षा परिषद की इस आपात बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे और विचार-विमर्श में उन्होंने हिस्सा भी लिया. दक्षिण कोरिया अपने पड़ोसी उत्तर कोरिया की सीमा से लगे एक द्वीप पर सैनिक अभ्यास के लिए अड़ा हुआ है. उत्तर कोरिया की जवाबी कार्रवाई की चेतावनी के बावजूद उसने कहा है कि अभ्यास ज़रूर होगा.

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