चीन ने भारतीय क्षेत्र के लगभग 1600 किमी लंबे भूभाग पर अपना दावा ठोकने के लिए आधार तैयार करना शुरू कर दिया है। भारत-चीन सीमा की लंबाई के बारे में सरकार नियंत्रित चीनी मीडिया में छप रही खबरों को देखने के बाद तो ऐसा ही आभास हो रहा है। चीनी मीडिया के अनुसार, दोनों देशो के बीच सीमा की लंबाई केवल 2 हजार किमी के करीब है। जबकि वास्तव में यह 3,500 किमी से ज्यादा है।
एक ओर जहां भारत और चीन सीमा विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत का दौर चला रहे हैं। वहीं चीन की सरकारी संवाद समिति शिन्हुआ और कम्युनिस्ट पार्टी के मुख पत्र पीपुल्स डेली के अंग्रेजी संस्करण 'ग्लोबल टाइम्स' के अनुसार, भारत-चीन सीमा की लंबाई महज 2 हजार किमी है। चीनी मीडिया ने भारत-चीन सीमा की लंबाई के बारे में विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है। चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के 17 दिसंबर को संपन्न हुई भारत की तीन दिवसीय यात्रा के पहले यह रिपोर्ट शिन्हुआ और ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित हुई थी। शिन्हुआ ने अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि भारत-चीन सीमा सिर्फ 2,000 किमी लंबी है। बीजिंग स्थित भारतीय राजदूत एस जयशंकर ने चीनी मीडिया के इस दावे का खंडन किया है। ग्लोबल टाइम्स को दिए साक्षात्कार में जयशंकर ने कहा है कि दोनों देशों के बीच 3,488 किमी लंबी सीमा है। मंगलवार को प्रकाशित इस साक्षात्कार में ग्लोबल टाइम्स ने जानबूझ कर यह नोट लगाया है कि चीन के दावे के अनुसार, दोनों देशों के बीच सीमा की लंबाई करीब 2 हजार किमी है।
जयशंकर रविवार को ही नई दिल्ली से बीजिंग लौटे हैं। वह जियाबाओ के दौरे के सिलसिले में भारत गए थे। इस बारे में उनकी ताजी प्रतिक्रिया नहीं हासिल की जा सकी। वेन जियाबाओ के दौरे से पहले भारत-चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर 14वें दौर की बातचीत समाप्त हुई थी। जियाबाओ और मनमोहन के बीच हुई बातचीत में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठा।

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