नोबेल पुरस्कार समारोह में शुक्रवार को जब विश्व की महत्वपूर्ण हस्तियां उपस्थित होंगी तो उस समय शांति के लिए नोबेल जीतने वाले चीन की जेल में बंद लिउ श्याआबो के लिए एक कुर्सी खाली छोड़ी जाएगी।
समारोह ओस्लो के सिटी हाल में आयोजित होगा। चीनी जेल में बंद होने की वजह से श्याआबो अपना पुरस्कार खुद ग्रहण नहीं कर पाएंगे, लेकिन उनके लिए वहां रखी गई खाली कुर्सी उनके सम्मान का प्रतीक होगी। नोबेल समिति के सचिव ने कहा कि लिउ का प्रतिनिधित्व एक खाली कुर्सी करेगी।
वर्ष 1936 के बाद यह पहली बार होगा जब शांति का नोबेल पुरस्कार किसी को नहीं सौंपा जाएगा। 1936 में एडोल्फ हिटलर ने शांति के लिए काम करने वाले जर्मन नागरिक कार्ल वोन ओसिएत्जकी को नोबेल पुरस्कार लेने से रोक दिया था । इस पुरस्कार को या तो खुद विजेता या फिर उसका कोई घनिष्ठ पारिवारिक सदस्य ग्रहण कर सकता है। शीतयुद्ध के दौरान सोवियत संघ के आंद्रेई सखारोव और पोलैण्ड के लेह वलेसा की ओर से उनकी पत्नियों ने पुरस्कार ग्रहण किया था। म्यांमार की लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सूकी की ओर से 1991 में उनके 18 वर्षीय बेटे ने नोबेल पुरस्कार ग्रहण किया था।
चीन ने लिउ की पत्नी और उनके समर्थकों को नजरबंद कर दिया है, ताकि वे पुरस्कार ग्रहण न कर सकें। चीन लिउ को पुरस्कार दिए जाने को अपनी राजनीतिक और कानूनी व्यवस्था पर हमला मान रहा है। चीन सरकार ने विदेशी राजनयिकों से भी इस समारोह में भाग न लेने के लिए कहा है। रूस, पाकिस्तान, ईरान, वेनेजुएला और क्यूबा सहित 18 देशों ने समारोह में भाग लेने से इनकार कर दिया है, जबकि ओस्लो में 65 दूतावासों में कम से कम 45 ने समारोह का आमंत्रण स्वीकार कर लिया है।

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