टाटा टेलीसर्विसेज ने रतन टाटा से सार्वजनिक बहस करने की सांसद राजीव चंद्रशेखर की चुनौती को टाल दिया है। इसके बजाय कंपनी ने उनके उठाए मसलों पर अपना रुख दोहराते हुए पत्र लिखा है। कंपनी ने यह भी कहा है कि आगे से वह चंद्रशेखर के प्रेस बयानों का कोई जवाब नहीं देगी, क्योंकि उसकी राय में उनसे बहस करना बेकार है।
गुरुवार को चंद्रशेखर ने कहा था कि टाटा और उनके बीच पत्रों के आदान प्रदान से कॉरपोरेट लड़ाई का गलत असर पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि इससे स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच पर भी असर पडऩे की आशंका है। टाटा टेली ने अपने बयान में कहा कि चंद्रशेखर ने पिछले हफ्ते उनकी ओर से भेजे गए पत्र का विस्तृत अध्ययन नहीं किया है। यही वजह है कि वह बेवजह बयानबाजी कर रहे हैं।
चंद्रशेखर ने पूर्व दूरसंचार नियामक प्रदीप बैजल की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं, जो टाटा समूह के साथ सलाहकार के तौर पर जुड़े है। इस बारे में कंपनी का कहना है कि ट्राई के मुखिया के तौर पर उनके पास बहुत सीमित थीं। कंपनी ने कहा कि ट्राई की भूमिका सिफारिश करने तक सीमित होती है, जबकि किसी भी मसले पर निर्णय लेने का अधिकार दूरसंचार विभाग पर होता है। ट्राई की सिफारिश को स्वीकार करना या उसे खारिज करना दूरसंचार विभाग पर निर्भर करता है। जहां तक बैजल की सिफारिश की बात है तो वह तकनीक पर आधारित थी और इसका टाटा टेलीसर्विसेज से किसी तरह का लेदना-देना नहीं था।
कंपनी ने कहा कि पूर्व ट्राई प्र्रमुख की आलोचना करना सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के अलावा और कुछ नहीं है।
शनिवार, 18 दिसंबर 2010
चंद्रशेखर पर टाटा समूह का पलटवार.
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