अमरीका ने रक्षा अनुसंधान विकास संस्था यानि डीआरडीओ और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्था यानि इसरो जैसी भारत सरकार की कई संस्थाओं को 'एंटिटी लिस्ट' से हटा दिया है. इसकी घोषणा अमरीका के वाणिज्य मंत्रालय ने सोमवार की शाम को की. ये भारत और अमरीका के बीच 'हाई टेक्नोलॉजी' व्यापार को बहाल करने के लिए निर्यात नियंत्रण नीति में सुधार लाने दिशा में पहला क़दम है.
भारत सरकार की कई साल से ये मांग रही है कि इन कंपनियों को एंटिटी लिस्ट से हटाया जाए ताकि ये अमरीका के साथ हाई टक्नोलॉजी क्षेत्र में व्यापार कर सकें. वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रपति बराक ओबामा और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बीच नवंबर में हुए समझौते के ऐलान के नतीजे में यह क़दम उठाया गया है.
अमरीका के वाणिज्य मंत्री गैरी लॉक ने इस घोषणा के बाद कहा कि इससे अमरीका और भारत के बीच 'सामरिक साझेदारी' को मज़बूत करने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा, "इस से हाई टेक्नोलॉजी व्यापार में मदद मिलेगी". गैरी लॉक इस घोषणा के बाद छह फरवरी को भारत के दौरे पर जाने की तैयारी कर रहे हैं. भारत के दौरे पर उनके साथ अमरीकी हाई टेक्नोलॉजी क्षेत्र के 24 प्रतिनिधि भी शामिल होंगे.
भारत को अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र में अमरीका की टेक्नोलॉजी और साज़ो-सामान की ज़रुरत है. लेकिन 1998 में परमाणु परीक्षण के बाद भारतीय कंपनियों पर लगी पाबंदी के कारण भारतीय कंपनियाँ अमरीका से हाई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में व्यापार नहीं कर सकती थीं. व्यापार करने के लिए भारतीय कंपनियों को अलग से लाइसेंस लेना पड़ता था जो परमाणु परीक्षण के कारण नहीं मिल पाता था.
राष्ट्रपति ओबामा ने नवंबर में अपने भारत की यात्रा के दौरान कहा था की भारतीय कंपनियों का परमाणु क्षेत्र में रिकार्ड साफ़ होने के कारण अब इनको 'एंटिटी लिस्ट' से हटा दिया जाएगा. सोमवार की शाम को होने वाली घोषणा इसी का नतीजा है. भारत इस क्षेत्र में अमरीका का एक बड़ा ग्राहक बन सकता है. गैरी लॉक की यात्रा छह फरवरी से 11 फरवरी तक होगी जिसके दौरान कई समझौते होने की संभावना है.

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