भारत और पाकिस्तान ने बयान जारी कर दोनों देशों के बीच सभी मुद्दों पर बातचीत शुरु करने पर सहमति जताई है. दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों की ओर से गुरुवार को लगभग एक ही समय पर जारी किए गए बयानों में कहा गया है कि दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की थिम्पू में अप्रैल 2010 में बातचीत के बाद और उन्हीं की ओर दिए गए आदेशों के तहत दोनों देशों के विदेश सचिवों की थिम्पू में बैठक हुई और आम सहमति बनी है.
दोनों देशों के बीच समग्र वार्ता प्रक्रिया पर नवंबर 2008 के मुंबई हमलों के बाद विराम लगा हुआ है. भारत की ओर से बातचीत के लिए लगातार ये शर्त लगाई जा रही थी कि पाकिस्तान अपनी भूमि पर भारत-विरोधी चरमपंथ के नेटवर्क को नष्ट करे. पाकिस्तान लगातार ये कह रहा था कि वह चरमपंथी हमलों का निशाना बना है और इस दिशा में सभी संभव प्रयास कर रहा है.
बीबीसी हिंदी सेवा के प्रमुख अमित बरुआ के अनुसार, "इसे समग्र वार्ता प्रक्रिया की दोबारा शुरुआत माना जा सकता है चाहे इस बातचीत को उस तरह की संज्ञा नहीं दी गई है. दोनों देशों ने दोबारा बातचीत शुरु करने का साहस दिखाया है. लेकिन यदि कोई सार्थक बातचीत होनी है तो दोनों देशों को एक दूसरे पर भरोसा होना बहुत ज़रूरी है." भारत और पाकिस्तान के बयानों में उन्हीं शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा गया है पाकिस्तान के विदेश मंत्री जुलाई 2011 में भारत आएँगे, भारतीय विदेश मंत्री से मिलेंगे और उनके साथ वार्ता प्रक्रिया का जायज़ा करेंगे. दोनों देश इस बात पर सहमत हुए हैं कि भारत-पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले विभिन्न विभागों को सचिवों की बैठकें होंगी. जिन मुद्दों पर बातचीत होनी है वे हैं - आतंकवाद का सामना (जिसमें मुंबई हमलों का मुकदमा शामिल है), मानवीय मुद्दे, शांति और सुरक्षा (जिसमें विश्वास बढ़ाने के क़दम शामिल हैं), जम्मू और कश्मीर, दोनों देशों के बीच दोस्ताना रिश्तों के बढ़ाने के आदान-प्रदान, सियाचिन, आर्थिक मुद्दे, वूलर बराज, तुलबुल परियोजना, सर क्रीक.

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