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शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2011

मोबाइल फोन के प्रयोग से यादाश्त पर असर.

मोबाइल फोन से निकलने वाले विकिरण से याददाश्त घटने, पाचन क्रिया और नींद बाधित होने की समस्या पैदा हो सकती है। यह मानना है सरकार द्वारा गठित एक आठ सदस्यीय अंतर मंत्रालय पैनल का।

स्वास्थ्य मंत्रालय, जैवप्रौद्योगिकी विभाग और दूरसंचार विभागों के प्रतिनिधियों वाले इस पैनल के मुताबिक देश में मोबाइल फोन का विकिरण स्तर अंतर्राष्ट्रीय मानकों से कहीं अधिक है। भारतीय मानकों के अनुसार छह मिनट की अवधि में स्थानीय विशिष्ट अवशोषण दर (एसएआर) दो वाट प्रति किलो होना चाहिए। लेकिन जलवायु और दूसरी वजहों से भारत में इसका प्रभाव यूरोपीय देशों की तुलना में अधिक पड़ता है।

एसएआर के अधिक होने से मोबाइल ग्राहक अधिक विकिरणों के प्रभाव में आता है। पैनल के एक सदस्य ने कहा कि उन्होंने एसएआर को घटाकर 1.6 फीसदी किए जाने की सलाह दी है। पैनल की रिपोर्ट में हैंड्सफ्री प्रौद्योगिकी का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है, ताकि मोबाइल फोन और शरीर के बीच अधिक से अधिक दूरी रखी जा सके। इसके साथ अधिक विकिरण पैदा करने वाले मोबाइल फोनों पर प्रतिबंध लगाने की भी बात की गई है।

रिपोर्ट में बच्चों, किशोरों और गर्भवती महिलाओं को अधिक मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी गई है। पैनल की रिपोर्ट में कहा गया है कि मोबाइल फोन के विकिरण के कारण शहरों में पर्यावरण की समस्याएं पैदा हो रही हैं और तितलियां, मधुमक्खियां, कीड़ों और गोरैयों की मौजूदगी घट रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मोबाइल टावर को अधिक आबादी वाले क्षेत्रों, स्कूलों, खेल के मैदानों और अस्पतालों के निकट नहीं स्थापित किया जाना चाहिए। पैनल की रिपोर्ट से टेलीकॉम टावर के विकिरणों पर एक राष्ट्रीय नीति तथा दिशानिर्देश तैयार करने में मदद मिलेगी।

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