आजकल मोबाइल जीवन का हिस्सा बन चुका है और इसके बगैर जीवन की कल्पना करना मुश्किल है। हाथ में मोबाइल न हो तो ऐसा लगता है जैसे कुछ खो सा गया है। आदतें ऐसी हो गई हैं कि रात में भी बगैर मोबाइल के नींद नहीं आती। मगर यह मोबाइल मेनिया खतरनाक हो सकता है क्योंकि मोबाइल को वाइब्रेशन मोड पर ज्यादा देर तक इस्तेमाल करने से कैंसर होने का डर होता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ केलिफोर्निया के एक हालिया शोध के अनुसार रात में मोबाइल वाइब्रेशन या साइलेंट मोड पर करके अपने तकिए के पास रखना सेहत के लिए जहर का काम करता है। मोबाइल में सिग्नल के लिए जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें आती हैं वह दिमाग की कोशिकाओं की वृद्धि को प्रभावित करती हैं और इससे ट्यूमर विकसित होने का डर होता है।
कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉक्टर शलभ गुप्ता ने बताया कि मोबाइल टावर से और आपके मोबाइल फोन को जोड़ने के लिए जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें निकलती हैं वह दिमाग की कोशिकाओं के विकास को प्रभावित करती हैं। दिमाग के भीतर भी सूचनाओं का आदान-प्रदान इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों के जरिए ही होता है।
मोबाइल को तकिए के पास रखने से दिमाग की प्राकृतिक तरंगें प्रभावित होती हैं। इस खलल के कारण शरीर में कैंसर सहित कई परेशानियां होने का जोखिम बढ़ जाता है। दिमाग की प्राकृतिक तरंगों में खलल के कारण दिमाग की कोशिकाओं का स्वभाविक विकास रूक जाता है। वह पूर्ण विकसित होने से पहले ही विभाजित होने लगती हैं और ट्यूमर बना लेती हैं। इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों में व्यवधान आने पर दिमाग तक संदेश पहुंचने में परेशानी होती है। कई बार संदेश पहुंचाने की इस प्राकृतिक क्रिया में देर होने लगती है तो कभी संदेश गलत पहुंचता है। इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर उत्कर्ष अनल का कहना है, मोबाइल को वाइब्रेशन मोड पर रखने पर उसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों का प्रवाह सामान्य मोड के मुकाबले ज्यादा तेजी से होने लगता है, जिससे दिमाग की फ्रिक्वेंसी डिस्टर्ब होती हैं। इस गड़बड़ी के कारण मस्तिष्क की संदेश ग्रहण करने की क्षमता प्रभावित होती है, जो आगे चलकर कई परेशानियों का कारण बनती है।
कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रविकांत अरोड़ा का कहना है कि मोबाइल फोन से न सिर्फ बेन ट्यूमर बल्कि अन्य कई तरह की परेशानियां भी होती हैं। उनका कहना है कि कैंसर आज भी एक ऐसी बीमारी है, जिसके तमाम तरह के इलाज के बावजूद यह इंसान की उम्र कम कर देती है। ऐसे में कैंसर पैदा करने वाले कारकों से दूर रहना जरूरी है। कई शोधों ने यह साबित किया है कि मोबाइल फोन को तकिए के पास रखकर सोने से कैंसर होता है। ऐसे में बेहतर है कि फोन को तकिए से दूर रखा जाए ताकि दिमाग की प्राकतिक तरंगों की आवाजाही में कोई बाधा न आने पाए और फोन को हमेशा रिंग मोड पर रखना चाहिए।

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