सभी शक्तियों में ईशवरीय शक्ति सर्वोपरि है, सभी प्रेम संबंधों में
ईशवरीय सम्बन्ध सर्वोच्च होता है, सभी कलाओं में वह दिव्य
कलाकार ही रहता है| जब तुम अपना मस्तिष्क ईश्वर में लगा
देते हो जो सभी चुमबकीय शक्तियों में सर्वोपरि है तो तुम
उस दिव्य चुम्बक की शक्ति से ओतप्रोत हो जाते हो|
(श्री परमहंस योगानंद)
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