सेवानिवृत्त कैप्टन आईएसआई एजेंट. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 1 फ़रवरी 2011

सेवानिवृत्त कैप्टन आईएसआई एजेंट.


आईएसआई के लिए काम करने के आरोप में हिमाचल पुलिस की सीआईडी विंग की टीम ने चंडीमंदिर के कंटोनमेंट एरिया से एक सेवानिवृत्त ऑनरेरी कैप्टन को गिरफ्तार किया है। आरोपी पूर्व सैन्य अधिकारी घनश्याम सिंह गुलेरिया हिमाचल के कांगड़ा के मलखेड़ क्षेत्र का रहने वाला है। इसके अलावा हिमाचल पुलिस ने खुफिया सूचनाएं पाक एजेंसी आईएसआई तक पहुंचाने के आरोप में कांगड़ा के भगवानदास और मंडी के हवाला कारोबारी अमरीक सिंह गुलाटी को भी गिरफ्तार किया है।  

सोमवार को हिमाचल सीआईडी की टीम गुपचुप तरीके से चंडीमंदिर के कंटोनमेंट क्षेत्र में पहुंची और जासूसी के आरोपी घनश्याम को धर दबोचा। आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद हिमाचल पुलिस अपने साथ शिमला ले गई। गुलेरिया के अलावा हिमाचल पुलिस ने दो अन्य आईएसआई एजेंटों को भी गिरफ्तार किया है। इनमें से एक कांगड़ा जिले के ज्वालामुखी क्षेत्र के खुंडिया का निवासी भगवानदास है। वह पूर्व सैनिक रह चुका है और सोमवार को ही पशुपालन विभाग में कंपाउंडर पद से रिटायर होने वाला था। अन्य दबोचा गया आरोपी मंडी का हवाला कारोबारी अमरीक सिंह गुलाटी है।

शिमला से हिमाचल सीआईडी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक आईडी भंडारी ने बताया कि सीआईडी द्वारा अभी तक की गई जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं। इसमें हवाला के जरिए रुपयों के लेनदेन और पाकिस्तान से फोन आने के बारे में कई अहम जानकारियां मिली हैं। उन्होंने कहा कि एक आरोपी के फोन पर पकड़े जाने के बाद भी फोन आते रहे है। आरोपियों से पूछताछ के दौरान सामने आया है कि आईएसआई ने हिमाचल के अलावा पंजाब और दिल्ली में बड़े पैमाने पर जासूसों का जाल बिछाया हुआ है। मंडी से गिरफ्तार किए गए हवाला कारोबारी अमरीक सिंह गुलाटी के माध्यम से पैसे पहुंचाए जा रहे थे। अमरीक सिंह ने हाल ही में एक करोड़ रुपये से भी ज्यादा का हवाला कारोबार किया है। उन्होंने बताया कि भगवानदास और घनश्याम सिंह गुलेरिया ने आईएसआई को हिमाचल प्रदेश में स्थित आर्मी केंटोनमेंट क्षेत्रों योल, सुबाथू, शिमला, कसौली, पठानकोट और अन्य के बारे में जानकारियां उपलब्ध करवाई है। इसके अलावा चंडीगढ़, पंजाब और दिल्ली के छावनी क्षेत्रों के बारे में आईएसआई को इन जासूसों द्वारा जानकारियां देने के भी सबूत सीआईडी के हाथ लगे है।

भंडारी ने कहा कि धर्मशाला के करमापा प्रकरण का आईएसआई मामले से कोई भी संबंध नहीं है। ये दोनों ही अलग-अलग मामले हैं। पुलिस इनकी विभिन्न पहलुओं पर गहराई से जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार कुछ आईएसआई एजेंट फर्जी सैनिक बनकर पूर्व सैनिकों से इस बहाने सूचनाएं एकत्रित कर रहे हैं कि वह पूर्व सैनिकों के कल्याण में कार्यरत हैं। बाद में यह सूचनाएं आईएसआई को सप्लाई की जाती हैं।

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