मुंबई के 26/11 हमले में शामिल आतंकवादी अजमल कसाब की बचाव याचिका पर तीन महीने तक सुनवाई करने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को फैसले की तारीख 21 फरवरी निर्धारित की. सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने कसाब को फांसी दिए जाने की मांग को ठीक ठहराते हुए इस पर जल्द अमल किए जाने की मांग की है.
बॉम्बे हाईकोर्ट में कसाब को फांसी की सजा दी जाए या नहीं, इसे लेकर 17 जनवरी को सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. सुनवाई के दौरान निकम ने कसाब और अन्य आतंकवादियों की तस्वीरें और सीसीटीवी फुटेज कोर्ट के सामने पेश की थी लेकिन कसाब के वकील अमीन सोलकर और फरहान शाह ने इन तस्वीरों के नकली होने का आरोप लगाया था.
26 नवंबर 2008 को हुए हमले से जुड़े अलग-अलग पांच आरोपों में अजमल कसाब को फांसी की और पांच आरोपों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. कसाब पर हत्या, हत्या की साजिश, देश के खिलाफ जंग छेड़ने, हत्या में सहयोग देने और गैर-कानूनी गतिविधि अधिनियम के तहत आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के आरोप है. वर्ष 2009 में स्पेशल कोर्ट के जज एम एल तहलियानी ने अपने फैसले में कहा था कि ऐसे आतंकवादी को जिंदा रखना समाज और भारत सरकार को खतरे में डालना होगा.

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