
अयोध्या की जमीन की मिल्कियत का मामला चार महीने के लिए फिर से ठंडे बस्ते में चला गया है. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले पर 31 मई तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है. इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने तीन अलग अलग याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. विशेष बेंच में जस्टिस एसयू खान, सुधीर अग्रवाल और वीके दीक्षित ने एम इस्माइल फारुकी की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद अपना फैसला फिलहाल बाद के लिए सुरक्षित रख लिया.
फारुकी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के 30 सितंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ याचिकाएं दी हैं. तब अदालत ने अयोध्या की जमीन को तीन हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था, जिसमें एक हिस्सा वक्फ बोर्ड को, दूसरा निर्मोही अखाड़ा और तीसरा रामलला के नाम किया गया है. अदालत ने इससे पहले 15 फरवरी तक के लिए मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था.
लंबे इंतजार के बाद न्यायालय ने पिछले साल 30 सितंबर को अपने आदेश में कहा था कि सभी पक्षों को तीन महीने के अंदर अपील करने की इजाजत होगी और उसका फैसला तीन महीने तक लागू नहीं होगा. अदालत ने बहुमत से फैसला किया था कि अयोध्या की विवादित जमीन को तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाए. इस मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी.
1 टिप्पणी:
जाने कब तक तडपाता रहेगा ये नासूर।
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पुत्र प्राप्ति के उपय।
क्या आप मॉं बनने वाली हैं ?
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