उल्फा के हल निकलने के आसार. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 6 फ़रवरी 2011

उल्फा के हल निकलने के आसार.

प्रतिबंधित संगठन उल्फा ने असम में 31 साल से चल रहे सशस्त्र संगठन का हल निकालने के लिए नयी दिल्ली में दस फरवरी को केंद्र के साथ बिना शर्त बातचीत शुरू करने का ऐलान किया है.    
बातचीत के पहले दौर को ‘सद्भावना वार्ता’ करार देते हुए उल्फा नेता शशधर चौधरी ने संवाददाताओं को बताया कि संगठन चाहता है कि वृहस्पतिवार को बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मौजूद रहें क्योंकि वह संसद में असम का प्रतिनिधित्व करते हैं.
यह पूछे जाने पर कि बातचीत के दौरान उल्फा की प्रमुख मांग ‘असम के लिए संप्रभुता’ पर भी चर्चा होगी, चौधरी ने सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा हमने बिना शर्त वार्ता करने का फैसला किया है. बातचीत के जरिए ही असम की समस्याओं के हल के लिए प्रक्रिया शुरू होगी.उन्होंने कहा असम के लोगों और जातीय अभिबारतन (बुद्धिजीवियों) की इच्छा का सम्मान करते हुए हमने बातचीत का फैसला किया है. अभी उल्फा ने बातचीत के लिए अपने नेताओं के नाम का फैसला नहीं किया है.
चौधरी ने कहा हालांकि बैठक के लिए उल्फा का एजेंडा अभी तैयार नहीं हुआ है लेकिन इसमें असम की सभी समस्याओं का जिक्र  होगा. उन्होंने कहा कि केंद्र के साथ शांति वार्ता करने का फैसला उल्फा की कार्यकारी समिति और सामान्य परिषद की इस सप्ताह संपन्न बैठक में किया गया. चौधरी ने कहा अगर हमने फिर से संप्रभुता का मुद्दा उठाया तो वार्ता नहीं होगी. हम बिना शर्त बातचीत के लिए तैयार हैं.यह पूछे जाने पर कि क्या उल्फा ने अपनी यह मांग त्याग दी है, उन्होंने कहा राज्य में 1979 के हालात के चलते, हमने असम के लिए संप्रभुता की मांग की थी. उल्फा का उदय हुआ और हमने अपना संघर्ष आगे बढ़ाया. अब हमें वही करना चाहिए जो असम की जनता चाहती है.
उल्फा नेता ने कहा हमारी मांग का घोषणापत्र तैयार है. हम असम के लोगों को बताएंगे कि वह क्या है. हम राज्य के हर वर्ग के लोगों की राय लेंगे. उन्होंने बताया हमारा एजेंडा निश्चित रूप से इस बात पर केंद्रित होगा कि राज्य की सामाजिक-आर्थिक समस्या के हल के लिए बेहतर विकल्प क्या है. चौधरी ने कहा वार्ता की सफलता केंद्र सरकार की गंभीरता तथा असम के लोगों की इच्छाओं पर निर्भर करेगी. वार्ता के तौर-तरीके सरकार तैयार करेगी. उन्होंने कहा यह एक औपचारिक मुलाकात होगी. इसके बाद तौर-तरीकों पर काम किया जाएगा। हम राज्य के सभी (उग्रवादी) समूहों और संगठनों से मिलेंगे तथा उनसे जानेंगे कि असम के लिए बेहतर क्या है. यह पूछे जाने पर कि क्या उनके फरार 'कमांडर इन चीफ परेश बरूआ की भागीदारी के बिना वार्ता सफल होगी, चौधरी ने कहा आप ऐसा क्यों सोचते हैं कि वार्ता सफल नहीं होगी. हमारी सोच सकारात्मक है कि वार्ता सफल होगी.

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