सोमवार की सुबह अचानक क्रिकेट प्रेमियों के बीच यह सुनकर हड़कंप मच गया कि शनिवार को वानखेड़े स्टेडियम में टीम इंडिया को जो विश्वकप ट्रॉफी दी गई है वो नकली है। खबर फैलते ही आईसीसी और बीसीसीआई ने एक आपात बैठक बुलाई और उसके तुरंत बाद मीडिया को यह स्पष्ट कर दिया कि भारत को दी गई ट्रॉफी पूरी तरह असली है और वही ट्रॉफी है, जो विश्व विजेता को दी जाती है। आईसीसी ने कहा नकली ट्रॉफी दिये जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
नकली ट्रॉफी दिए जाने के पीछे तर्क दिया गया कि असली ट्रॉफी कस्टम विभाग के पास जब्त है और उसे छुड़ाने के लिए कस्टम विभाग ने 15 लाख रुपए बतौर कस्टम ड्यूटी मांगे हैं। मीडिया में यह खबर आने के बाद इंटरनेट जगत में तो प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। लोगों ने ट्विटर और फेसबुक पर बीसीसीआई और आईसीसी के प्रति भड़ास निकालनी शुरू कर दी।हालांकि अब यह कंफ्यूज़न पूरी तरह समाप्त हो चुका है। आईसीसी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि टीम इंडिया को वानखेड़े स्टेडियम में दी गई ट्राफी एक दम असली है और उस पर उन 14 टीमों के लोगो बने हुए हैं, जिन्होंने टूर्नामेंट में भाग लिया था। बल्कि जो ट्रॉफी मुंबई एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग ने जब्त कर ली है, वो विश्वकप प्रोमोशन के लिए बनायी गई नकली ट्रॉफी है। हालांकि उसे भी आईसीसी जल्द छुड़ा लेगा।
आईसीसी ने कहा कि नियम के अनुसार यह ट्रॉफी कुछ दिन बाद दुबई में स्थित आईसीसी के कार्यालय में वापस ले जाकर रख दी जाएगी। उसकी जगह वैसी ही एक अन्य ट्रॉफी टीम इंडिया को भेंट कर दी जाएगी। और असली ट्रॉफी को अगले विश्वकप में फिर से बाहर निकाला जाएगा।

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