अन्ना हजारे से यह पूछे जाने पर कि क्या वह खुद चुनाव लड़कर संसद में आएंगे, तो उन्होंने कहा कि ‘मैं चुनाव में खड़ा हुआ तो मेरी जमानत जब्त होगी। सामान्य लोगों के लिए चुनाव लडऩा बहुत मुश्किल है। लोग अभी भी अपने मत की कीमत नहीं समझते हैं। एक बोतल, साड़ी व चंद रुपयों के लिए किसी को वोट डाल आते हैं।
आज एक चुनाव लडऩे में कई करोड़ रुपया खर्च होता है। जब नापसंदी जैसे हक मिलेंगे और नेताओं का करोड़ों रुपया पानी में बह जाएगा तब उनका दिमाग अपने आप ठिकाने पर आ जाएगा।’
अन्ना ने कहा कि उनकी तुलना लोग गांधी से न करें। उन्होंने कहा, ‘मेरी गांधीजी के पैर के पास बैठने की पात्रता भी नहीं है। गांधी जी का काम बहुत कठिन था। मैं गांधी के सिद्धांतों में यकीन रखता हूं। मैं अल्पशिक्षित हूं, वे बेरिस्टर थे। मेरी तुलना गांधी से मत करो। मैं अनशन पर बैठा, इतने लोग एकजुट हुए। पर मेरे मन में इसका कोई स्पर्श नहीं है कि मैं कुछ बन गया हूं। मैं आज भी वही गांव के मंदिर में रहने वाला अन्ना हूं।’

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