लोकपाल विधेयक के लिए संयुक्त मसौदा समिति की पहली बैठक के पूर्व सत्ताधारी दल कांग्रेस और केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों ने सिविल सोसायटी के नुमाइंदों पर दबाव बढ़ा दिया है। लोकपाल का मसौदा तैयार करने के लिए पहली बैठक शनिवार को हो रही है। समिति में शामिल सरकार अब सरकार अन्ना हजारे और उनके साथियों के दबाव में नहीं झुकेगी। सरकार मान रही है कि शुरुआती तीन-चार बैठकों में लोकपाल के अहम मुद्दों को चिन्हित किया जाएगा। चिन्हित मुद्दों के आधार पर विधेयक का मसौदा तैयार करने की दिशा में आगे बात होगी। केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि लोकपाल भ्रष्टाचार रोकने के लिए अहम संस्था होगी लेकिन इसे हम सरकार या न्यायपालिका पर नकेल कसने का औजार नहीं बनने देंगे, जिससे हमारी संवैधानिक व्यवस्था पर असर पड़े। सूत्रों का कहना है कि पहली बैठक के पहले सरकार और सिविल सोसाइटी दोनों ओर से कई मुद्दों पर गतिरोध बरकरार है।
संयुक्त समिति में शामिल सरकार के मंत्री इस बार पूरी तैयारी के साथ बैठक में भाग ले रहे हैं। समिति के अध्यक्ष प्रणब मुखर्जी ने समिति में शामिल मंत्रियों के साथ विभिन्न मुद्दों पर अनौपचारिक रूप से विचार किया है। कांग्रेस और सरकार का शीर्ष नेतृत्व चाहता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ बातचीत उन मुद्दों पर केंद्रित होकर न रहे जो मसले अन्ना और उनके साथी उठा रहे हैं।
कांग्रेस चाहती है कि भ्रष्टाचार के मसले पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का पांच सूत्री फॉर्मूला भी फोकस में होना चाहिए। सरकार न्यायपालिका की जवाबदेही के लिए अलग से कानून बनाना चाहती है लिहाजा सरकार इससे भी सहमत नहीं है कि लोकपाल न्यायपालिका पर नकेल कसे। कांग्रेस ने साफ तौर पर संकेत दिए हैं कि सरकार अन्ना और उनके साथियों की मांग पर अब उस अंदाज में झुकने को तैयार नहीं हैं, जैसा अन्ना के आंदोलन के बाद बने दबाव के चलते हुआ था। कांग्रेस मान रही है कि कमेटी में शामिल सभी प्रतिनिधियों को अब जिम्मेदारी पूर्ण व्यवहार करना चाहिए क्योंकि अब वे किसी आंदोलन का हिस्सा नहीं है बल्कि सरकार द्वारा गठित की गई एक समिति के सदस्य हैं जिसे एक संवैधानिक काम को अंजाम देना है। समिति में शामिल केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि हम सभी बहुत खुले मन से बैठक में शिरकत करने जा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जाहिर की है कि सभी पक्ष लचीला रुख अपनाएंगे। इसके पहले भी खुर्शीद ने कहा था कि समिति के सदस्यों को ऐसी लकीर नहीं खिंचनी चाहिए जिससे पीछे हटने में उन्हें तकलीफ हो।
संयुक्त समिति के लिए हामी भरने के बाद से सरकार और कांग्रेस की ओर से लगातार कई बयान ऐसे आए हैं जिन्हें सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों को उनकी लक्ष्मण रेखा का एहसास कराने से जोड़कर देखा गया। इसका कुछ असर भी नजर आ रहा है। लोकपाल के लिए बड़े आंदोलन की अगुवाई करने वाले अन्ना हजारे ने सुप्रीम कोर्ट को लोकपाल के दायरे में लाने के मसले पर पहले से लचीला रुख अपनाया है। सूत्रों का कहना है कि सरकार इस बात पर राजी नहीं है कि लोकपाल को ऐसी भूमिका दी जाए जिसमें वह सुपर पीएम या सुपर चीफ जस्टिस की भूमिका निभाए। लोकपाल की सिफारिशों को बाध्यकारी बनाने जैसे मसलों पर भी संयुक्त समिति के सदस्यों में गतिरोध है।

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