सामाजिक कार्यकर्ता विनायक सेन को रायपुर की जेल से सोमवार को रिहा कर दिया गया है लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार उन्हें अपना पासपोर्ट जमा कराने को कहा गया। नक्सलियों से संबंध और देशद्रोह के आरोप में उम्रकैद की सजा पाए सामाजिक कार्यकर्ता बिनायक सेन ने जमानत पर रिहा होने के बाद कहा कि मैं विश्वासघाती नहीं हूं। मेरे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जो टिप्पणी की है, उसके गहरे राजनीतिक निहितार्थ हैं। नक्सलियों से संबंधों के आरोपी बिनायक ने स्पष्ट कहा कि मैं किसी संगठन से सहानुभूति नहीं रखता। नक्सलियों से मेरे रिश्तों का कोई सबूत नहीं है।
राष्ट्रद्रोह से संबंधित कानून पर पुनर्विचार करने के कानून मंत्री वीरप्पा मोइली के रुख का बिनायक ने स्वागत किया। पिछले साल 25 दिसंबर से जेल में बंद सेन का कहना था कि मुझ पर लगाए गए देशद्रोह के आरोप सही नहीं हैं। मैंने कभी भी देश के साथ धोखा नहीं किया।
पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज के सदस्य सेन को जमानत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि सेन के खिलाफ देशद्रोह का कोई केस नहीं बनता। हम लोकतांत्रिक देश में रहते हैं। जहां तक लगता है, बिनायक सहानुभूति रखने वाले व्यक्ति हैं। किसी कारण के लिए इस तरह की हमदर्दी तमाम लोगों में हो सकती है। अदालत ने तो यहां तक कहा था कि महात्मा गांधी की जीवनी अगर किसी व्यक्ति के घर में मिलती है तो सिर्फ इसी से वह गांधीवादी नहीं हो जाता। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के कुछ घंटे बाद ही मोइली ने कहा था कि देशद्रोह से जुड़े कानून पुराने हो चुके हैं, जिन पर फिर से विचार करने की जरूरत है। मैं गृह मंत्री से बात करूंगा। अगर वह सहमत होते हैं तो यह मामला लॉ कमिशन को रेफर किया जा सकता है, जो तय करेगा कि इस कानून में बदलाव की जरूरत है या नहीं।
बिनायक ने देशद्रोह के कानून में बदलाव के देशव्यापी आंदोलन की जरूरत बताते हुए कहा कि मेरे जैसे हजारों लोग हैं, जिन्हें देशद्रोह का आरोप लगाकर जेल में बंद कर दिया गया है। हम ऐसी स्थिति लाना चाहते हैं, जिसमें अंग्रेजों के जमाने के कानून के बजाय लोगों की देशभक्ति को तवज्जो दी जाती हो। छत्तीसगढ़ सरकार पर टिपण्णी करते हुए बिनायक ने कहा कि अगर आप अच्छा नागरिक बनने की कोशिश करेंगे तो राज्य सरकार इसे सहन नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि जेल से बाहर आकर मैं बहुत खुश हूं और इतने बड़े पैमाने पर समर्थन के लिए लोगों को धन्यवाद देता हूं। मेरे लिए देश और विदेश में आंदोलन हुए। मैं अकेला नहीं हूँ।

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