बाबाओं को भगवान बनाता हिंदी मीडिया !! - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

मंगलवार, 26 अप्रैल 2011

बाबाओं को भगवान बनाता हिंदी मीडिया !!

अगर आप प्राइम टाइम पर खबर देखने बैठते हैं तो जाहिर है कि देश और दुनिया की गंभीर विषयों पर खबर के साथ चर्चा के अभिलाषी होते हैं मगर हाय रे हमारी हिंदी मीडिया जो वक्त बेवक्त या तो यह साबित करती है कि हिंदी के मीडिया की औकात क्या है या फिर हिंदी के पाठक और दर्शक को बताती और जताती रहती है कि जो दिखा रहा हूँ वही तुम्हारी औकात है.

सत्य साईं का गुजरना हिंदुस्तानी हिंदी मीडिया के लिए सबसे बड़ी खबर बन गई, जिस साईं पर विश्वास के साथ छल और धोखाधड़ी का भी आरोप रहा है वो सत्य साईं मीडिया के लिए भगवान् बन गया या यूं कहें की मीडिया ने भगवान् बना दिया. कभी सचिन को भगवान तो कभी सत्य साईं को भगवान, मानो मीडिया भगवान का जन्मदाता हो जाहिर है ईश्वर के जन्मदाता पर आधुनिक ईश्वर (मुद्रा राक्षस) की मेहरबानी हो तो हमारी अनपढ़ जाहिलों और निकम्मों से भरी मीडिया अपने पिता को भी भगवान् बना दे.

जरा तस्वीरों पर नजर मारिये ये शाम के साढ़े नौ बजे की प्रमुख ख़बरों का नजारा हिंदी खबरिया चैनल से है. हमारे देश का भ्रमित गैर जिम्मेदार खबरिया चैनल किस कदर खबर के बाजार में लोगों की संवेदना और विश्वास को
बेचने का धंधा करता है का जीता जगता उदाहरण.



खबरिया चैनल को देखने के बाद बाबा
रामदेव हो या गुरमीत राम रहीम (डेरा सच्चा सौदा) या फिर और भी कई धार्मिक लबादा ओढ़े बाबाओं की फ़ौज, इन ख़बरों से अपनी मौत के बाद के हालातों पर जरूर निश्चिंत हो गए होंगे की मरने के बाद का काम हिंदी खबरिया चैनल पूरा कर ही देगा. आखिर बाबाओं को भगवान् बनाने का ठेका हमारी हिंदी मीडिया ने जो ले रखा है.



हिंदी प्रेमी हूँ मगर बे सिर पैर की खबर के
कारण अर्नब गोस्वामी का सटीक परिचर्चा ही सही लगा और बेमन से हिंदी प्रेम त्यागते हुए टाइम्स नाउ पर चर्चाओं में लीन हो गया मगर सोचनीय ही रहा की हमारा हिंदी मीडिया देश
को क्या दे रहा है?

कोई टिप्पणी नहीं: