राडिया का शरद पवार और मारन पर आरोप. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 14 अप्रैल 2011

राडिया का शरद पवार और मारन पर आरोप.


  वैष्णवी कम्युनिकेशंस की प्रमुख और कॉरपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया ने सीबीआई अधिकारियों के सामने दिए गए अपने बयान में केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार और पूर्व दूरसंचार मंत्री और मौजूदा टेक्सटाइल मंत्री दयानिधि मारन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।  राडिया के अनुसार ऐसा संभव है कि शरद पवार विवादास्‍पद फर्म डीबी रियल्‍टी को नियंत्रित कर रहे हैं और पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा के साथ मिलकर स्‍वान टेलीकॉम को लाइसेंस दिलाने में मदद की।

राडिया ने कहा है कि मारन ने टाटा समूह के लिए भी कई मुश्किलें खड़ी की थीं। उन्होंने ये आरोप ड्यूल टेक्नोलॉजी के लाइसेंस के सिलसिले में लगाए हैं। राडिया ने सीबीआई के समक्ष अपने बयान में टाटा रियल्टी और यूनिटेक के बीच डील करवाने की बात भी मानी है।

राडिया के अनुसार टाटा समूह की दूरसंचार कंपनी टाटा टेलीसर्विसेज लिमिटेड (टीटीएसएल) ड्यूल टेक्नोलॉजी स्पेक्ट्रम के दावेदारों में से एक थी। कंपनी ने इसके लिए 22 अक्टूबर 2007 को आवेदन किया था। लेकिन टीटीएसएल को यह कहते हुए स्पेक्ट्रम नहीं दिया गया कि दूसरी कंपनियों ने उनसे पहले आवेदन कर रखा है।राडिया के मुताबिक टीटीएसएल अन्य किसी भी कंपनी के मुकाबले पहले स्पेक्ट्रम आवंटन की हकदार थी क्योंकि उसके पास यूनिफाइड एक्सेस लाइसेंस (यूएएस) था और उसने ड्यूल टेक्नोलॉजी के लिए पैसे भी चुका दिए थे। राडिया ने गवाही में स्वान टेलीकॉम के खिलाफ भी कई बातें कही हैं। उन्होंने कहा है कि यह कंपनी क्रॉसहोल्डिंग नियमों के कारण यूएएस लाइसेंस पाने की भी हकदार नहीं थी। राडिया ने कहा है, 'जहां तक मेरी जानकारी है, यह कंपनी पूरी तरह रिलायंस कम्युनिकेशंस द्वारा नियंत्रित थी।

राडिया ने कहा है कि टीटीएसएल ने 2006 में उत्तर पूर्व, जम्मू-कश्मीर और असम सर्किल में सीडीएमए सेवाओं में यूएएस लाइसेंस के लिए आवेदन किया था, लेकिन तत्कालीन संचार एवं सूचना प्रसारण मंत्री दयानिधि मारन ने इसके लिए मना कर दिया। इसमें वजह यह बताई गई कि बाइसेल नाम की किसी कंपनी ने टीटीएसएल से पहले आवेदन कर रखा है। इसके अलावा इसके साथ सुरक्षा का भी मामला जुड़ा था। टीटीएसएल से कहा गया कि बाइसेल का मामला निपटने से पहले उसे यूएएस लाइसेंस नहीं दिया जा सकता है।राडिया ने कहा है कि टीटीएसएल और यूनिटेक लिमिटेड के बीच गुडग़ांव में जमीन के लिए एक संयुक्त उपक्रम बनाया गया था। इसके लिए टाटा समूह की कंपनी टाटा रियल्टी ने करीब 1700 करोड़ रुपये यूनिटेक को दिए थे। बाद में बाजार की हालत खराब होने के कारण सौदा पूरा नहीं हो सका और यूनिटेक ने यह रकम टाटा रियल्टी को लौटा दी।

पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा के निजी सचिव आर.के. चंदोलिया के साथ अपनी बातचीत के बारे में राडिया ने सफाई दी है कि यह बातचीत टाटा स्काई के प्लैटफॉर्म पर कलाइगनार टीवी को लाने के सिलसिले में थी। राडिया के मुताबिक टाटा स्काई पर जगह कम होने के कारण कलाइगनार टीवी को उसके प्लैटफॉर्म पर जगह नहीं मिल पाई थी। राडिया ने चंदोलिया के साथ कई बार बातचीत होने की बात मानी है। इसके अलावा चंदोलिया के 'बॉस' ए. राजा के साथ अपनी बातचीत को भी उन्होंने स्वीकार किया है।

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