भारत और चीन ने फैसला किया है कि वो दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर एक नई सीमा प्रबंधन व्यवस्था की स्थापना करेंगे. दोनों ने सैन्य रिश्तों को मज़बूत करने के इरादे से अपने सैनिक दलों को दूसरे देश में लगातार भेजते रहने का भी निर्णय किया है.
इसके तहत भारत के उत्तरी कमान की एक टुकड़ी इस साल चीन भेजी जा रही है.
ये फैसले भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ के बीच चीन के सानया मे हुई एक बैठक के दौरान लिया गया. मनमोहन सिंह इन दिनों ब्रिक्स देशों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए चीन के दौरे पर हैं.
मनमोहन सिंह और हू जिंताओ के बीच पचास मिनट तक चली इस बैठक के दौरान सीमा विवाद के अलावा जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को चीन द्वारा नत्थी वीज़ा देने, पारस्परिक व्यापार और दूसरे मामलों पर भी बातचीत हुई. भारत के सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन ने इस बैठक को लाभकारी बताया और कहा कि बातचीत दोस्ती और गर्मजोशी के माहौल में हुई.
अधिकारियों का कहना था कि सीमा विवाद पर नई व्यवस्था के भीतर जो कार्यसमिति बनाई जाएगी उसमें भारतीय और चीनी विदेश मंत्रालय के उच्चाधिकारी शामिल होंगे. कार्यसमिति इस मुद्दे पर एक-दूसरे से लगातार मंत्रणा करके समन्वय स्थापित करने का काम करेगी. भारत और चीन के बीच सैन्य आदान-प्रदान भी पिछले एक साल से बंद पड़ा था जिसकी शुरूआत रिश्तों में मज़बूती के तौर पर देखा जा रहा है.
भारत-चीन ने सीमा विवाद को सुलझाने की पहले भी कई कोशिशें की हैं. हू जिंताओ ने बयान दिया है कि भारत के साथ रक्षा मामलों पर बातचीत में जो रूकावट आई थी उस पर विचार विर्मश हुआ है. चीन ने संकेत दिए हैं कि वो जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को नत्थी वीज़ा देने के मामले पर भी भारत के पक्ष पर गंभीरता से विचार कर रहा है. जम्मू-कश्मीर के चार लोगों को चीनी दूतावास ने सामान्य वीज़ा भी दिया है.

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