सुप्रीम कोर्ट में मानवाधिकार कार्यकर्ता बिनायक सेन की जमानत याचिका पर सुनवाई फिलहाल टल गई है। सुनवाई की अगली तारीख अदालत ने 15 अप्रैल निर्धारित की है। 24 दिसंबर 2010 को रायपुर की एक निचली अदालत ने बिनायक सेन और दो अन्य लोगों को राजद्रोह का दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस मामले में अन्य दो दोषी नारायण सान्याल (भाकपा-माओवादी पोलित ब्यूरो के सदस्य) और पीयूष गुहा (कोलकाता के व्यापारी) हैं।
निचली अदालत के फैसले के खिलाफ बिनायक सेन ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। लेकिन हाईकोर्ट ने बिनायक सेन की जमानत याचिका ठुकरा दी थी। इस फैसले को चुनौती देते हुए बाद में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। सेन की रिहाई की अपील दुनिया भर के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने की है।
बिनायक सेन को मई, 2007 में बिलासपुर में गिरफ्तार किया गया था। मई 2009 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उन्हें जमानत मिली थी। किंतु, पिछले साल कोर्ट द्वारा देशद्रोह का दोषी करार देने के बाद फिर से उन्हें जेल में डाल दिया गया।
निचली अदालत के फैसले के खिलाफ बिनायक सेन ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। लेकिन हाईकोर्ट ने बिनायक सेन की जमानत याचिका ठुकरा दी थी। इस फैसले को चुनौती देते हुए बाद में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। सेन की रिहाई की अपील दुनिया भर के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने की है।
बिनायक सेन को मई, 2007 में बिलासपुर में गिरफ्तार किया गया था। मई 2009 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उन्हें जमानत मिली थी। किंतु, पिछले साल कोर्ट द्वारा देशद्रोह का दोषी करार देने के बाद फिर से उन्हें जेल में डाल दिया गया।

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