
बिहार विकाश में जिस केंद्रीय गतिरोध का रोना नीतीश कुमार अक्सर रोते हैं और केंद्र को बिहार विकास का रोड़ा बताते हैं उसी नीतीश के सांसद विकास मद के पैसे खरचने में नाकाबिल साबित हो रहे हैं. अपने अपने मद से अपने अपने क्षेत्र का विकास करने में असफल ये सांसद अपने निधि को क्षेत्र तक पहुँचाने में निष्क्रिय हैं ऐसा केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यन्वयन मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट साबित करती है.
बिहार के सांसद अपने फंड खर्च करने में कंजूसी बरतते रहे हैं। केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यन्वयन मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट इस तथ्य की तसदीक करती है। बिहार के सांसदों के फंड खर्चने की गति देश के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे कम है। क्षेत्रीय विकास की यह राशि बेकार पड़ी रही। दूसरे राज्यों के सांसदों ने इस कोष का शत प्रतिशत उपयोग किया है, लेकिन बिहार के सांसदों ने शुरू से लेकर अब तक कभी 87 फीसदी से अधिक राशि खर्च नहीं की।
केंद्र सरकार के मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि सांसद निधि में 1993 से अब तक कुल 1113.95 करोड़ रूपए आवंटित हुए, लेकिन बिहार के सांसदों ने 978.44 करोड़ रूपए ही खर्च किए। इस मद में अब तक 156.10 करोड़ रूपए बेकार पड़े हैं। पुडुचेरी के सांसद इस निधि को खर्च करने में सबसे आगे रहे। पुडुचेरी के सांसदों ने आवंटित राशि में से 101.21 प्रतिशत राशि खर्च कर दी। मिजोरम में खर्च प्रतिशत 97.43 और अरूणाचल में 97.38 है। सांसदों के एक लाख 42 हजार प्रस्ताव खारिज हुए और 94 हजार लंबित हैं। इनमें से अधिकांश प्रस्ताव बिहार के सांसदों के ही थे।
पिछले वित्तीय वर्ष में भी बिहार के सांसदों द्वारा निधि के उपयोग की गति धीमी ही थी। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन की सांसद निधि बेकार ही पड़ी रही। पूर्व मुख्यमंत्री राम सुंदर दास समेत साठ फीसदी बिहार के सांसदों ने आवंटित निधि में से 6 से लेकर 93 फीसदी राशि खर्च किया था। लालू को एक करोड़ आवंटित हुए, लेकिन उन्होंने अधैला भी खर्च नहीं किया। जदयू के अध्यक्ष शरद यादव की निधि का एक करोड़ और भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन का एक करोड़ भी बेकार पड़ा है। सांसद कीर्ति आजाद, सुशील कुमार सिंह, संजय जायसवाल, अश्वमेघ देवी, जगदीश शर्मा, दिनेश यादव, उमाशंकर सिंह, ललन सिंह, भूदेव चौधरी, महेश्वर हजारी, रामा देवी और अर्जन राय भी उन सांसदों में शुमार हैं जिनकी निधि के पैसे बेकार पड़े हैं।
बिहार में पूर्णिया से सांसद उदय सिंह को एक करोड़ आवंटित हुए और उन्होंने इसमें से 93 लाख रूपए खर्च कर दिए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और हाजीपुर से सांसद राम सुंदर दास को तीन करोड़ 24 लाख आवंटित हुए और दास ने इसमें से दो करोड़ सात लाख खर्च डाला है। खर्च करने में उनकी रफ्तार 83.33 प्रतिशत है और वह दूसरे नंबर पर हैं। मुजफ्फरपुर से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री कैप्टन जयनारायण निषाद ने अपने कोटे की 75 फीसदी रकम खर्च की है।
निषाद को तीन करोड़ आवंटित हुए जिसमें से उन्होंने दो करोड़ पच्चीस लाख खर्च किए हैं। बेगूसराय से सांसद मोनाजिर हसन ने तीन करोड़ दो लाख में से एक करोड़ 85 लाख खर्च किया है। उनकी खर्च करने की गति 61.26 प्रतिशत है। फिल्म अभिनेता और भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा को निधि के तीन करोड़ आवंटित हो चुके हैं। उन्होंने इसमें से एक करोड़ 78 लाख यानी 59.35 प्रतिशत राशि अब तक खर्च की है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और मोतिहारी से सांसद राधामोहन सिंह ने आवंटित एक करोड़ में से 53 लाख खर्च किए। उनके कोटे का 47 लाख बेकार पड़ा है।
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