दलालों के चंगुल में फंसकर दिल्ली पहुंचीं राज्य की 10 लड़कियों को छुड़ा कर रांची तो ले आया गया, लेकिन अभी भी 200 लड़कियां दिल्ली के कई शेल्टर होम में बंद हैं। ये वहां घरेलू काम कर रही थीं। उनके काम के घंटे तय नहीं थे। उनके साथ मारपीट भी की जाती थी। भारतीय किसान संघ, बाल कल्याण समिति और दिल्ली पुलिस के सहयोग से इन्हें छुड़ाया गया है। छुड़ाई गई लड़कियों की उम्र 11 से 16 वर्ष बीच है।
राज्य सरकार के समाज कल्याण विभाग की इसमें बड़ी भूमिका रही। ठिकाने से छुड़ाई गईं लड़कियों को पहले निर्मल छाया, दिल्ली में रखा गया था। उसके बाद उन्हें भारतीय किसान संघ के दिल्ली के ही ट्रांजिट होम भेज दिया गया। बाल कल्याण समिति के निर्देश पर रांची में उन्हें संघ के ट्रांजिट होम किशोरी निकेतन में रखा गया है।
समाज कल्याण मंत्री विमला प्रधान ने आज उन लड़कियों की मौजूदगी में हुई प्रेस से कहा कि अप्रैल 2010 से अप्रैल 2011 तक कुल 64 लड़कियों को दिल्ली, गुजरात, उत्तरप्रदेश और कर्नाटक आदि राज्यों से छुड़ाकर उन्हें उनके घर वापस भेज दिया गया है। भारतीय किसान संघ और एटसेक के साथ दिल्ली और झारखंड पुलिस के संयुक्त प्रयास से ऐसा संभव हो सका है। उन्होंने बताया कि बीजूपाड़ा के किशोरी निकेतन में फिलहाल 20 ऐसी लड़कियां हैं, यहां उन्हें शिक्षा के साथ स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाता है। समाज कल्याण विभाग इस सिलसिले में भारतीय किसान संघ की मदद कर रहा है। बीकेएस के निदेशक और एटसेक के समन्वयक संजय मिश्र ने बताया कि समाज कल्याण विभाग ट्रैफिकिंग की शिकार लड़कियों के पुनर्वास की दिशा में काम कर रहा है। उनकी संस्था सरकार के साथ मिलकर ऐसी लड़कियों को सुरक्षा गार्ड, हाउस कीपिंग और ड्राइविंग जैसे काम के लिए ट्रेनिंग देने पर विचार कर रही है।
राज्य सरकार के समाज कल्याण विभाग की इसमें बड़ी भूमिका रही। ठिकाने से छुड़ाई गईं लड़कियों को पहले निर्मल छाया, दिल्ली में रखा गया था। उसके बाद उन्हें भारतीय किसान संघ के दिल्ली के ही ट्रांजिट होम भेज दिया गया। बाल कल्याण समिति के निर्देश पर रांची में उन्हें संघ के ट्रांजिट होम किशोरी निकेतन में रखा गया है।
समाज कल्याण मंत्री विमला प्रधान ने आज उन लड़कियों की मौजूदगी में हुई प्रेस से कहा कि अप्रैल 2010 से अप्रैल 2011 तक कुल 64 लड़कियों को दिल्ली, गुजरात, उत्तरप्रदेश और कर्नाटक आदि राज्यों से छुड़ाकर उन्हें उनके घर वापस भेज दिया गया है। भारतीय किसान संघ और एटसेक के साथ दिल्ली और झारखंड पुलिस के संयुक्त प्रयास से ऐसा संभव हो सका है। उन्होंने बताया कि बीजूपाड़ा के किशोरी निकेतन में फिलहाल 20 ऐसी लड़कियां हैं, यहां उन्हें शिक्षा के साथ स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाता है। समाज कल्याण विभाग इस सिलसिले में भारतीय किसान संघ की मदद कर रहा है। बीकेएस के निदेशक और एटसेक के समन्वयक संजय मिश्र ने बताया कि समाज कल्याण विभाग ट्रैफिकिंग की शिकार लड़कियों के पुनर्वास की दिशा में काम कर रहा है। उनकी संस्था सरकार के साथ मिलकर ऐसी लड़कियों को सुरक्षा गार्ड, हाउस कीपिंग और ड्राइविंग जैसे काम के लिए ट्रेनिंग देने पर विचार कर रही है।

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