सुप्रीम कोर्ट मानवाधिकार कार्यकर्ता बिनायक सेन की जमानत अर्जी पर शुक्रवार को सुनवाई करेगा. बिनायक सेन को राजद्रोह और नक्सलियों के साथ संबंध होने के आरोपों में उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है. 61 वर्षीय सेन ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी जिसने 10 फरवरी को उनकी जमानत अर्जी को खारिज कर दिया था.
पेशे से डॉक्टर और वेल्लूर के प्रतिष्ठित क्रिस्चियन मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई करने वाले सेन ने जमानत मांगते हुए दलील दी थी कि निचली अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए भूल की है जबकि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है. न्यायमूर्ति एचएस बेदी और न्यायमूर्ति सीके प्रसाद की पीठ ने 11 अप्रैल को सुनवाई टाल दी थी. तब छत्तीसगढ़ सरकार ने मामले में दलील देने के लिए और समय मांगा था.
पिछली सुनवाई के दौरान सेन के परिजन, पीयूसीएल के कार्यकर्ता और सेन के मामले पर निगरानी रख रहे यूरोपीय संघ के दो सदस्य मौजूद थे. सेन की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए प्रदेश सरकार ने अपने हलफनामे में कहा था कि सेन को कोई राहत नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि उनके कट्टर नक्सलियों से करीबी रिश्ते हैं. बिनायक सेन की गिरफ़्तारी और सज़ा का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ा विरोध हुआ है और विश्व की जानी मानी हस्तियों ने भारतीय प्रधानमंत्री से उनकी रिहाई की अपील की थी.

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