अल कायदा आतंकियों ने चेतावनी दी थी कि अगर ओसामा बिन लादेन को पकड़ा या मारा गया तो वे परमाणु हमला कर दुनिया तबाह कर देंगे। यह खुलासा विकीलीक्स ने गोपनीय दस्तावेज के आधार पर किया है। ये दस्तावेज गुआंतानामो बे में कैद कैदियों से हुई पूछताछ से संबंधित हैं। इन कैदियों से पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि आतंकवादी अमेरिका, ब्रिटेन सहित दुनिया के कई देशों में किसी बड़े हमले की साजिश रच रहे थे।
दस्तावेजों के मुताबिक ये कैदी आतंकवादी अमेरिका और ब्रिटेन समेत एशिया और अफ्रीका के कई देशों में भी हमले की फिराक में थे। बंदियों के निशाने पर अमेरिका और इसके सहयोगी देश थे। इनकी प्राथमिकता में उन देशों पर हमला शामिल था जिसका अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ता हो। दूसरी प्राथमिकता में वैसे देश थे जो राजनीतिक रूप से ज्यादा जागरूक थे।
दस्तावेज से यह भी लगता है कि 11 सितंबर, 2001 को अमेरिका में हुए आतंकी हमले के तार पाकिस्तान से जुड़े हैं। गोपनीय जानकारियां सार्वजनिक कर नाम कमा चुके विकीलीक्स के मुताबिक 11 सितंबर, 2001 को अल कायदा के तमाम बड़े नेता पाकिस्तान के शहर कराची में मौजूद थे। अमेरिकी जंगी पोत यूएसएस कोल पर बम बरसाने का आरोपी मास्टरमाइंड एक अस्पताल में भर्ती था। पास में ही 2002 में हुए बाली (इंडोनेशिया) बम विस्फोट का आरोपी जैविक हमले के लिए साज-ओ-सामान खरीद रहा था। और, 9/11 हमले का बौद्धिक लेखक होने का दावा करने वाला शख्स एक सुरक्षित मकान में बैठकर न्यूयार्क और वाशिंगटन का ताजा हाल टीवी पर देख रहा था। हमले के बाद 24 घंटे के भीतर ही अल कायदा के ये सभी बड़े नेता अफगानिस्तान निकल गए, ताकि लंबी लड़ाई को अंजाम दिया जा सके।
विकीलीक्स द्वारा हासिल और सार्वजनिक किए गए दस्तावेज में 11 सितंबर, 2001 के हमले के बाद आतंकियों के ठिकानों और उनकी गतिविधियों के बारे में काफी जानकारी दी गई है। इसमें अल कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन और उसके सहयोग अमन अल-जवाहिरी के ठिकानों और अभियान के बारे में भी जानकारी दी गई है। 'वाशिंगटन पोस्ट' समेत अमेरिकी और ब्रिटिश अखबारों को मुहैया कराए गए दस्तावेजों में करीब 780 कैदियों का ब्यौरा दर्ज है जो 2002 से ही क्यूबा के गुआंतनामो बे जेल में बंद हैं। इन दस्तावेजों में जानकारों ने खुफिया जानकारी के आधार पर इन बंदियों का पूरा खाका खींचा है। इन बंदियों को उनके बारे में मिली खुफिया जानकारियों के मुताबिक 'हाई', 'मीडियम' और 'लो' की कैटेगरी में रखा गया है। इसका पैमाना इन बंदियों की रिहाई के बाद इनसे अमेरिका को पैदा होने वाले खतरों की आशंका के लिहाज से तय किया गया है। दस्तावेज में उन बंदियों पर भी सरसरी तौर पर नजर डाली गई है जिन्हें फेडरल कोर्ट ने सबूतों के अभाव में रिहा करने के आदेश दिए। इनमें 220 खतरनाक किस्म के आतंकवादी हैं जबकि 380 निचले दर्जे के आतंकी हैं। इनके अलावा 150 कैदी ऐसे थे जिन्हें सबूतों के अभाव में गुआंतनामो बे जेल से रिहा कर दिया गया। इनमें निर्दोष अफगानी और पाकिस्तानी नागरिक भी शामिल थे। अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन ने इन तरह की जानकारियां सार्वजनिक होने को 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया है। पेंटागन का कहना है कि बंदियों के बारे में ये जानकारियां अधूरी हैं।

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