कितनी ही लड़कियों के ऊपर सामूहिक अत्याचार और उनकी हत्या को जायज ठहराने वाली और उन्हे उनके गुनाहों की सजा सुनाने वाली खाप पंचायतों पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपना फैसला सुना दिया। सुप्रीम कोर्ट ने सम्मान के नाम पर हत्या को जायज ठहराने वाली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा की खाप पंचायतों को लोकतंत्र में भारतीय समाज पर एक खून से सना धब्बा करार दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहाकि खाप पंचायतें पूरी तरह से अवैध हैं। वे बेहद क्रूर, जंगली और शर्मनाक हैं। खाप पंचायतों के खिलाफ कार्यवाही ना करने वाले अधिकारियों और नौकरशाहों को कानूनन कड़ी सजा देने की चेतावनी भी सुप्रीम कोर्ट ने दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इन खाप पंचायतों को सामंतवादी मानसिकता को फैलाने और फिर से स्थापित करने के लिए दोषी भी ठहराया।
युवाओं के जाति से बाहर शादी करने पर उनकी मौत का फरमान सुनाने वाली खाप पंचायतों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई किए जाने की ताकीद की है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने हरियामा के मनोज और बली केस में बबली के परिवापवालों की ओर से दायर याचिका पर ये फैसला सुनाया है। मालूम हो कि मनोज के पुलिस अधिकारियों से सहायता मांगने के बावजूद उसे कोई सहाययता नहीं दी गई और आखिरकार इस जोड़े का अपहरण करने के बाद उन्हे बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया था।

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