चीन की बढ़ती सैन्य ताकत पर अंकुश लगाने के लिए अमेरिका एशिया में अपनी दखल बढ़ाना चाहता है। अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन का यह दावा है कि एशिया में उसके सहयोगी देश ही ऐसा चाहते हैं कि वो इस इलाके में अपनी दखल बढ़ाए।
अमेरिकी प्रशांत कमान के प्रमुख एडमिरल रॉबर्ट विलर्ड ने अमेरिकी सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि चीन ने जब पिछले साल पूर्वी एशियाई देशों की समुद्री सीमा में कई नौसैनिक हमले किए थे तो अमेरिका के कई सहयोगी देशों ने मदद मांगी थी। अमेरिकी सांसदों ने परंपरागत गठबंधन को लेकर भी चिंता जताई। उनकी चिंता चीन की बढ़ती सैन्य ताकत और एशियाई मुल्क में चीन के दबदबे को लेकर भी थी। सांसदों ने इस इलाके में ऑस्ट्रेलिया और अन्य सहयोगी देशों से सैन्य संबंध मजबूत करने पर होने वाले भारी खर्च को लेकर भी चिंता जताई। दिसम्बर में उत्तर कोरिया की ओर से पड़ोसी दक्षिण कोरिया पर किए गए हमलों के बाद प्रायद्वीप पर तनाव बढ़ गया था। उत्तर कोरिया चीन का करीबी है जबकि दक्षिण कोरिया अमेरिका के करीब है। इन हमलों के बाद अमेरिका ने चीन को चेतावनी दी कि यदि उसने उत्तर कोरिया पर दबाव नहीं बनाया तो वह फिर से एशिया में अपनी सेनाएं भेजने पर मजबूर हो जाएगा।
दुनिया की सबसे बड़ी फौज चीन के पास है और वह अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर अमेरिका को तगड़ी चुनौती दे रहा है। बीते साल 23 नवंबर को उत्तर कोरिया ने जब दक्षिण कोरिया के एक द्वीप पर गोले बरसाए और दक्षिण कोरिया की नौसेना के एक जहाज को डूबा दिया तो अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया की तीखी आलोचना की। लेकिन उत्तर कोरिया के जरिए अमेरिका को दक्षिण-पूर्व एशिया में चुनौती देने की कोशिश में जुटे चीन ने इस मसले पर कूटनीतिक मोर्चा संभाला और उलटे अमेरिका और दक्षिण कोरिया की तीखी आलोचना कर डाली। हमले के बाद किए गए सैन्य अभ्यास के लिए चीन ने दक्षिण कोरिया और अमेरिका की खिंचाई की। हमले के तुरंत बाद चीन ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तर कोरिया पर दबाव बनाने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया था। चीन को ऐसा लग रहा है कि अमेरिका दक्षिण-पूर्व एशिया के इस हिस्से में उपजे तनाव का फायदा इस इलाके में अपनी सैनिक ताकत बढ़ाने के लिए कर रहा है।
'हिंद महासागर में चीन की बढ़ती सैन्य ताकत और प्रभाव को देखते हुए अमेरिका को भारत के साथ साझेदारी और मजबूत करना चाहिए।' इस क्षेत्र में संतुलन के लिए यह साझेदारी जरूरी है।' - अमेरिकी विशेषज्ञ और हेरिटेज फाउंडेशन के डीन छेंग

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