घोटालों के चलते छवि को पहुंचे नुकसान को स्वीकार करते हुए कांग्रेस नीत संप्रग सरकार ने रविवार को भ्रष्टाचार से सीधे तौर पर निपटने का प्रण किया और कहा कि दोषियों को दंडित किया जाएगा और यह साबित किया जाएगा कि हम जो कहते हैं, वह करके दिखाते हैं।
संप्रग-2 सरकार के दो वर्ष पूरे होने के मौके पर जारी रिपोर्ट कार्ड में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आश्वासन दिया कि सरकार भविष्य में घोटालों को रोकेगी और उच्च अधिकारियों तथा नेताओं के विवेकाधीन और मनमाने ढंग से अधिकार के इस्तेमाल को कम किया जाएगा। सोनिया ने पहले भी कहा था कि मुख्यमंत्री अपने विवेकाधीन अधिकारों को खत्म करें या उसमें कटौती करें।
रिपोर्ट में मौजूद अपनी संक्षिप्त टिप्पणियों में सोनिया ने कहा कि हम भ्रष्टाचार के मुद्दे से सीधे तौर पर निपटेंगे और शब्दों के बजाय कार्यों से यह साबित करेंगे कि हम जो कहते हैं, वह करके दिखाते हैं।
सिंह और सोनिया ने प्रधानमंत्री आवास पर यह रिपोर्ट जारी की। इस मौके पर हुए समारोह में गठबंधन में शामिल दलों और सरकार को बाहर से समर्थन दे रही सपा और राजद जैसी पार्टियों के नेताओं ने भाग लिया।
हालांकि, उत्तर प्रदेश में कांग्रेस से सियासी जंग लड़ रही बसपा ने समारोह में भाग नहीं लिया। चुनावी हार और अपनी सांसद कनिमोई की गिरफ्तारी से आहत द्रमुक की ओर से केवल प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व रहा। सरकार में शामिल द्रमुक के छह में से किसी भी मंत्री ने जश्न में भाग नहीं लिया। पार्टी की ओर से केवल उसके संसदीय दल के नेता टी आर बालू को समारोह में भाग लेने भेजा गया।
द्रमुक और कांग्रेस में बढ़ते तनाव को समारोह में साफ देखा गया। प्रधानमंत्री और संप्रग अध्यक्ष, दोनों के भाषणों से इसके संकेत मिले। सोनिया ने कहा कि हाल के पांच विधानसभा चुनाव के नतीजों का साझा संदेश यह है कि जनता एक अच्छा, प्रभावशाली और जवाबदेह शासन चाहती है। वहीं, प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में हर राजनीतिक दल की जिम्मेदारी राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित कराने की है। सिंह ने कहा कि सुशासन एक चुनौती है और राजनीतिक स्थिरता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन, राष्ट्रमंडल खेलों से जुड़ी खरीद और अनुबंध तथा राज्य सरकारों में भी समान तरह के कई घटनाक्रम हुए हैं। इस तरह सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार का मुद्दा जनता के लिए चिंता का विषय बन गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन घटनाक्रमों ने कई नागरिकों को शासन की स्थिति और भ्रष्टाचार की व्यापकता को लेकर चिंता में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि ये जायज चिंताएं हैं और संप्रग सरकार सुधारात्मक उपाय करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। हम उचित कानूनी प्रक्रिया के जरिए दोषियों को दंडित करेंगे। हम भविष्य में इन घटनाक्रमों को रोकने के लिए कदम उठाएंगे और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा विवेकाधीन तथा मनमाने ढंग से अधिकार के इस्तेमाल को कम करेंगे।
सोनिया ने कहा कि भ्रष्टाचार के बारे में काफी कुछ कहा जा चुका है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदारी हमारे शासन के मुख्य केंद्र में है। हमारे कदम इस बात को साबित करेंगे। सोनिया ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद पद से नहीं हटाने के लिए भाजपा को भी जाहिर तौर पर आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ विपक्षी दल अपनी बारी आने पर ईमानदारी के उच्च मानक नहीं बनाए रखते।
रिपोर्ट में आर्थिक हालात, कृषि, ग्रामीण विकास, शिक्षा, बाहरी तथा आंतरिक चुनौतियां, रेलवे और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों का जिक्र है। सिंह और सोनिया ने कहा कि संप्रग सरकार उच्च आर्थिक वृद्धि दर बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो समावेशी रहेगी और महंगाई पर लगाम लगाएगी। सिंह ने कहा कि घोटालों के कई मामले हमारी संस्थागत निगरानी व्यवस्था और स्वतंत्र प्रेस के जरिए सामने आ पाए जो काफी हद तक हमारी व्यवस्था की ताकत को दर्शाता है। सिंह ने कहा कि हमने व्यवस्थागत बदलाव लाने के लिए कई उपाय किए हैं जिनसे शासन में सुधार लाने और भ्रष्टाचार से निपटने में मदद मिलेगी। हमें उम्मीद है कि इन कोशिशों के त्वरित नतीजे देखने को मिलेंगे। रिपोर्ट कार्ड में भ्रष्टाचार के मामलों से निपटने के लिए सरकार द्वारा किए गए उपायों के रूप में इस वर्ष जनवरी में गठित मंत्री-समूह और भंडाफोड़ करने वालों की सुरक्षा से जुड़े विधेयक का विस्तृत तौर पर उल्लेख किया गया।

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