कमलनाथ का बाबा रामदेव को समर्थन. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 24 मई 2011

कमलनाथ का बाबा रामदेव को समर्थन.

विदेशी बैंकों में जमा काला धन वापस लाने के लिए बाबा रामदेव 5 जून से सत्‍याग्रह शुरू कर रहे हैं। असल में यह सत्‍याग्रह केंद्र सरकार के ही खिलाफ है, जिसकी बागडोर कांग्रेस के हाथ में है। ऐसे में कांग्रेस के ही नेता कमलनाथ का बाबा को समर्थन देना कुछ अटपटा नहीं लगता! दरअसल यह कांग्रेस की वो चाल है, जिसमें उसने ना केवल बाबा को फंसाने की कोशिश की है, बल्कि देश की जनता को बरगलाने के भी भरपूर प्रयास किये हैं। आप सोच रहे होंगे, कि आखिर कांग्रेस ऐसा क्‍यों कर रही है?

यूपीए-2 के दो साल पूरे होने के ठीक पहले पेट्रोल के दामों में सीधे 5 रुपए की वृद्धि की गई। डीजल और रसोई गैस के दाम भी इसी सप्‍ताह बढ़ने हैं। इस बात को लेकर देश की जनता में पहले की खासा गुस्‍सा भरा हुआ है और कांग्रेस की सबसे बड़ी प्रतिद्वन्‍द्वी भारतीय जनता पार्टी इसे भुनाने निकल पड़ी। भाजपा ने देश भर में विरोध प्रदर्शन किये और आंदोलन की चेतावनी दे दी। ऐसे में कांग्रेस के लिए जनता का ध्‍यान भटकाना जरूरी हो गया, क्‍योंकि अगर एक बार जनता के मन में भाजपा के लिए अच्‍छी छवि बन गई, तो उत्‍तर प्रदेश तो दूर अगली बार केंद्र में भी उसे जगह नहीं मिलेगी। इसीलिए कांग्रेस ने बैक डोर से शतरंज के उस प्‍यादे को निकाला जिसे कमलनाथ कहा जाता है। केंद्रीय मंत्री कमलनाथ ने बाबा को ऐसा मक्‍खन लगाया कि जनता तो दूर पूरा मीडिया उसी की तरफ डाइवर्ट हो गया। बस कांग्रेस यही चाहता भी था। अब भाजपा कुछ भी करे, जनता का ध्‍यान पेट्रोल की कीमतों पर से हट गया है। यानी जब तक बाबा रामदेव और कांग्रेस का पाठ चलेगा तब तक भाजपाईयों का सुर्खियों में आना मुश्किल है।

कांग्रेस की इस चाल में मनमोहन सिंह से लेकर सोनिया गांधी तक सब शामिल हैं। एक तरफ कमलनाथ बाबा का जप कर रहे हैं, दूसरी तरफ मनमोहन, सोनिया दोनों ही कनिमोझी, ए राजा, शाहिद बलवा, सुरेश कलमाड़ी आदि को सलाखों के पीछे डाल अपनी पीठ थपथपा रही है। कांग्रेस ने इस बार यह अकलमंदी दिखाई कि कमलनाथ की जगह दिग्विजय को नहीं चुना, वो इसलिए क्‍योंकि सत्‍ताधारी पार्टी ने शतरंज के इस घोड़े को नकारात्‍मक बातें बोलने के लिए ही रख रखा है। कांग्रेस पहले भी बाबा रामदेव को निशाना बनाकर भाजपा को दबा चुकी है। जब भाजपा बाबा रामदेव के साथ जुड़ने के प्रयास कर रही थी, तब दिग्विजय बनाम रामदेव की लड़ाई ने ही भाजपा को किनारे कर दिया था।

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