दिल्ली में ऑटो चालक जीपीएस सिस्टम लगाने के आदेश के खिलाफ बेमियादी हड़ताल पर चले गए हैं.
ऑटो और टैक्सी यूनियनों का दावा है कि हड़ताल की वजह से करीब 55 हजार ऑटो और नौ हजार काली-पीली टैक्सियां सड़कों से नदारद रहेंगी. दिल्ली सरकार ने हड़ताली ऑटो औऱ टैक्सी चालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की धमकी दी है.
ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने दिल्ली सरकार के उस नियम को रद्द करने की मांग कर रहे हैं जिसमें ऑटो और टैक्सी चालकों को अपने खर्च पर जीपीएस सिस्टम लगाने को कहा गया है. ऑटो औऱ टैक्सी चालकों का कहना है कि वो जीपीएस सिस्टम लगाने को तो तैयार हैं लेकिन जीपीएस लगाने में आने वाले दस से 15 हजार रूपए का खर्च सरकार उठाए. चालक की मौत पर उसके परिवार वालों को आर्थिक सहायता देने और बच्चों की पढ़ाई में रियायत दे.
सरकार जीपीएस सिस्टम लगाने के अपने निर्देश पर कायम है और सरकार का कहना है कि अगर ऑटो और टैक्सी चालक हड़ताल पर गए तो उनका रजिस्ट्रेशन रद्द करने के साथ साथ दूसरी बड़ी कार्रवाई की जाएगी. संगठन के अध्यक्ष राजेंद्र सोनी का कहना है कि हम जीपीएस के खिलाफ नहीं है. लेकिन इसके लिए सरकार हमें सब्सिडी दे. उन्होंने कहा कि इंश्योरेंस की बढ़ाई 75 प्रतिशत राशि और टोल टैक्स में बढ़ोतरी को भी वापस लिया जाए. उनका यह भी कहना है कि सरकार पिछले एक साल से वेलफेयर बोर्ड बनाने की बात कर रही है , लेकिन अब वह हमें लिखकर दे तभी हम अपनी हड़ताल वापस लेंगे. सोनी ने कहा है कि सरकार ने हमेशा आटो वालों को कोई सुविधा देने के बजाय उन्हें परेशान करने के कदम उठाए हैं .
परिवहन मंत्री अरविंदर सिंह लवली का कहना था कि ऑटो चालकों को हर हाल में जीपीएस लगवाना होगा और सरकार इस पर समझौता नहीं करेगी. संगठनों की गुजारिश पर अब यह सहूलियत दे दी गई है कि एक साथ 7,500 रुपये देने के बजाय हर माह किश्त के रूप में एक साल तक 625 रुपये देने होंगे. लवली का कहना था यह सिस्टम लगाने की प्रक्रिया 20 मई के बजाय अब पहली जून से शुरू की जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ऑटो चालकों के लिए वेलफेयर बोर्ड बनाने के वादे पर कायम है. सरकार दिल्ली वालों को सुरक्षित परिवहन सुविधा देने को प्रतिबद्ध है. इसीलिए ग्रामीण सेवा के साथ रेडियो टैक्सी में भी जीपीएस सिस्टम लगाया गया. उन्होंने कहा कि सरकार ने उनकी मांग मान ली है,अब वे हड़ताल वापस ले लें.
ऑटो और टैक्सी यूनियनों का दावा है कि हड़ताल की वजह से करीब 55 हजार ऑटो और नौ हजार काली-पीली टैक्सियां सड़कों से नदारद रहेंगी. दिल्ली सरकार ने हड़ताली ऑटो औऱ टैक्सी चालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की धमकी दी है.
ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने दिल्ली सरकार के उस नियम को रद्द करने की मांग कर रहे हैं जिसमें ऑटो और टैक्सी चालकों को अपने खर्च पर जीपीएस सिस्टम लगाने को कहा गया है. ऑटो औऱ टैक्सी चालकों का कहना है कि वो जीपीएस सिस्टम लगाने को तो तैयार हैं लेकिन जीपीएस लगाने में आने वाले दस से 15 हजार रूपए का खर्च सरकार उठाए. चालक की मौत पर उसके परिवार वालों को आर्थिक सहायता देने और बच्चों की पढ़ाई में रियायत दे.
सरकार जीपीएस सिस्टम लगाने के अपने निर्देश पर कायम है और सरकार का कहना है कि अगर ऑटो और टैक्सी चालक हड़ताल पर गए तो उनका रजिस्ट्रेशन रद्द करने के साथ साथ दूसरी बड़ी कार्रवाई की जाएगी. संगठन के अध्यक्ष राजेंद्र सोनी का कहना है कि हम जीपीएस के खिलाफ नहीं है. लेकिन इसके लिए सरकार हमें सब्सिडी दे. उन्होंने कहा कि इंश्योरेंस की बढ़ाई 75 प्रतिशत राशि और टोल टैक्स में बढ़ोतरी को भी वापस लिया जाए. उनका यह भी कहना है कि सरकार पिछले एक साल से वेलफेयर बोर्ड बनाने की बात कर रही है , लेकिन अब वह हमें लिखकर दे तभी हम अपनी हड़ताल वापस लेंगे. सोनी ने कहा है कि सरकार ने हमेशा आटो वालों को कोई सुविधा देने के बजाय उन्हें परेशान करने के कदम उठाए हैं .
परिवहन मंत्री अरविंदर सिंह लवली का कहना था कि ऑटो चालकों को हर हाल में जीपीएस लगवाना होगा और सरकार इस पर समझौता नहीं करेगी. संगठनों की गुजारिश पर अब यह सहूलियत दे दी गई है कि एक साथ 7,500 रुपये देने के बजाय हर माह किश्त के रूप में एक साल तक 625 रुपये देने होंगे. लवली का कहना था यह सिस्टम लगाने की प्रक्रिया 20 मई के बजाय अब पहली जून से शुरू की जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ऑटो चालकों के लिए वेलफेयर बोर्ड बनाने के वादे पर कायम है. सरकार दिल्ली वालों को सुरक्षित परिवहन सुविधा देने को प्रतिबद्ध है. इसीलिए ग्रामीण सेवा के साथ रेडियो टैक्सी में भी जीपीएस सिस्टम लगाया गया. उन्होंने कहा कि सरकार ने उनकी मांग मान ली है,अब वे हड़ताल वापस ले लें.

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