2008 में काबुल स्थित भारतीय दूतावास पर हुए आतंकी हमले में पाकिस्तान का हाथ होने की अटकलें अब सच साबित होती दिख रही हैं। विकीलीक्स के ताजा खुलासे में यह बात सामने आई है कि भारतीय दूतावास पर हुए आतंकी हमलों में पाकिस्तान का हाथ था। विकीलीक्स के मुताबिक पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) ने भारतीय अधिकारियों को बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी थी कि हमलावर कौन हैं।
26 फरवरी 2008 को काबुल स्थित भारतीय दूतावास पर हुए हमले में सात हिंदुस्तानी नागरिकों समेत 16 लोगों की मौत हो गई थी। मरने वालों में फ्रांस का एक फिल्म निर्माता और इटली का राजनयिक भी शामिल था। शुरू में ही इस घटना के तार पाकिस्तानी सेना से जुड़ते दिखे।
अफगानिस्तान में आतंकवाद विरोधी दस्ते ने पाकिस्तानी सेना में कैप्टन फतेह हजरत अब्दुल रज्जाक अली से पूछताछ की थी। इसमें पता चला कि हेरात स्थित आईएसआई के दो अधिकारियों ने काबुल में गेस्ट हाउसों में हमले की योजना बनाई थी। हजरत को इस हमले के मास्टरमाइंडों में एक माना जाता है। उसे 30 मार्च 2008 को ही अफगानिस्तान में गिरफ्तार कर लिया गया था।
विकीलीक्स के एक अन्य खुलासे के मुताबिक मुंबई में 2008 को हुए आतंकी हमलों के बाद अमेरिका ने पाकिस्तान पर इस बात के लिए दबाव डाला कि वो अपने खुफिया अधिकारियों को भारत भेजें, जिससे यह पता चले कि पाकिस्तान इन हमलों को लेकर गंभीर है और इसकी जांच में भारत को सहयोग कर रहा है।
26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई हमलों के तीन दिन बाद अमेरिका ने पाकिस्तान से यह भी कहा था कि यदि इस हमले में पाकिस्तानी सरकार का हाथ है तो इसकी जांच करना बेहद जरूरी है। पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिक डेविड हेडली ने शिकागो की अदालत में बयान दिया था कि मुंबई हमलों में आईएसआई का हाथ था। ऐसे में विकीलीक्स का ताजा खुलासा बेहद अहम है। विकीलीक्स के गोपनीय संदेशों के मुताबिक अमेरिका ने मुंबई हमलों के बाद आईएसआई चीफ शुजा पाशा को भारत भेजने के लिए दबाव बनाया था लेकिन इससे कुछ हासिल नहीं हुआ। इन संदेशों से साफ है कि पाकिस्तान पर अमेरिका का कितना प्रभाव है, खासकर जब भारत से रिश्तों की बात हो।

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