ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद पाकिस्तान में अमेरिका के विरोध में उठ रही आवाज़ों के बावजूद पाकिस्तान सरकार ने अमेरिका से कहा है कि उनका देश भविष्य में ओसामा की तर्ज पर होने वाले हमले में उनका साथ देगा। मतलब साफ है कि अमेरिका पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादियों को घुसकर मारता रहेगा. चाहे पाकिस्तान में चरमपंथी तत्व अमेरिका के विरोध में जितनी आवाज़ उठाएं. अमेरिका पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादियों को खत्म करने के लिए अपने अभियान चलाता रहेगा।
ओसामा की मौत के बाद अमेरिका को तालिबान के मुल्ला उमर की तलाश है। माना जाता है कि उमर पाकिस्तान के ही कबाइली इलाकों में छुपकर अपने मंसूबों को अंजाम दे रहा है।पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी पाकिस्तान और अमेरिका के बीच बेहतर रिश्ते बनाने और तालमेल पर जोर देने की बात कही। विदेश मंत्रालय के मुताबिक अमेरिका और पाकिस्तान भविष्य में होने वाले ऑपरेशन में मिलकर काम करेंगे।
अमेरिकी सांसद जॉन केरी ने इस्लामाबाद में पाकिस्तानी अधिकारियों से मुलाकात के दौरान कहा कि पाकिस्तान आंतकी ठिकानों को तबाह करने के काम में तेजी लाए। केरी ने यह भी जानकारी दी कि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद बिगड़े रिश्ते को सुधारने के लिए कई समझौते हुए हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों को खत्म करने के लिए अमेरिका को पाकिस्तान के मदद की जरूरत है।
ओसामा की मौत के बाद अमेरिका ने पाकिस्तान के कबाइली इलाकों में ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। उत्तरी वजीरिस्तान के मीर अली इलाके में सोमवार को हुए ड्रोन हमले में दस लोग मारे गए हैं। माना जा रहा है कि इनमें से ज़्यादातर आतंकवादी थे। ताजा घटनाक्रम में उत्तरी वजीरिस्तान में नाटो हेलीकॉप्टर के हमले में दो पाकिस्तानी सैनिक जख्मी हो गए। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक यह घटना मंगलवार को दत्ता खेल इलाके में हुई।
पाकिस्तान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि वह ऐबटाबाद जैसी कार्रवाई से बाज आए। लेकिन अमेरिका ने साफ तौर पर कह दिया था कि अगर मुल्ला उमर के बारे में पुख्ता जानकारी मिली तो ऐबटाबाद जैसा ऑपरेशन करेगा। अमेरिका के सांसद जॉन कैरी ने अफगानिस्तान दौरे पर पत्रकारों से कहा था कि तालिबान प्रमुख मुल्ला उमर के पाकिस्तान में होने पर अमेरिका के सभी विकल्प खुले हैं। अमेरिका के अधिकारियों का मानना है कि मुल्ला उमर 2001 में तालिबान सरकार पलटने के बाद से पाकिस्तान में छुपा है। हालांकि पाकिस्तान इससे हमेशा इनकार करता रहा है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें