राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने 1993 में तत्कालीन युवक कांग्रेस के अध्यक्ष मनिंदर जीत सिंह बिट्टा पर हमले के मामले में फांसी की सजा प्राप्त बठिंडा के देविंदर सिंह भुल्लर की दया याचिका खारिज कर दी। उसकी दया याचिका सात साल से लंबित थी। इस हमले में कई लोग मारे गए थे।
मंत्रालय के सूत्रों ने यह जानकारी दी। राष्ट्रपति भवन ने इस बारे में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। इससे पहले भुल्लर के वकील केटीएस तुलसी ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी। इसमें कहा गया था कि या तो भुल्लर की दया याचिका पर कोई फैसला लिया जाए अथवा उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया जाए।
भुल्लर को 1993 में बिट्टा और 1991 में पंजाब के एसएसपी सुमेध सिंह सैणी पर हमला करने के आरोप में 25 अगस्त 2001 को निचली अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी। बाद में हाईकोर्ट व 2003 में सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी फांसी की सजा को बरकरार रखा। दिल्ली में बिट्टा पर हुए हमले में कई लोगों की मौत हो गई थी, जबकि बिट्टा गंभीर रूप से घायल हो गए थे। भुल्लर पंजाब का तीसरा आतंकवादी होगा, जिसे फांसी मिलेगी। जबकि इससे पहले जनरल वैद्य के हत्यारे सुक्खा और जिंदा को फांसी मिली थी। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने असम के महेंद्रनाथ दास की दया याचिका भी खारिज कर दी। उसे भी निचली अदालत ने हाराकांत दास की हत्या का दोषी पाए जाने पर फांसी की सजा सुनाई थी। इसके मामले में भी शीर्ष अदालत ने यह सजा बरकरार रखी थी।

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