केंद्रीय नेतृत्व मुंडे को गंवाना नहीं चाहता. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 21 जून 2011

केंद्रीय नेतृत्व मुंडे को गंवाना नहीं चाहता.


गोपीनाथ मुंडे के बगावती तेवरों ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को गहरे संकट में डाल दिया है। पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व मुंडे को गंवाना भी नहीं चाहता है और उनके सामने समर्पण करते हुए भी नहीं दिखना चाहता है। इसके लिए वह उनकी अधिकांश मांगों को मानने के लिए तैयार भी है, लेकिन मुंडे के कांग्रेस के साथ संपर्क और पार्टी तोड़ने की कोशिश से उसकी मुसीबतें बढ़ी हैं।

प्रदेश अध्यक्ष सुधीर मुंगनटीवार ने एलान किया कि मंगलवार को मुंबई में महाराष्ट्र के सभी सांसदों, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों व पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में संबंधित मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि इन नेताओं से सवाल क्या पूछा जाएगा।

वरिष्ठ सूत्रों की मानें तो आलाकमान ने यह कदम यह साबित करने के लिए उठाया है कि मुंडे के मसले पर पार्टी में यह आम राय है कि उन्हें महाराष्ट्र के मामले में खुली छूट नहीं दी जा सकती। जबकि मुंडे के करीबी सूत्रों का दावा था कि यह कदम मुंडे के हक में होगा, क्योंकि ज्यादातर सांसद व विधायक उनके साथ हैं।

 सोमवार को भी दिनभर पार्टी के केंद्रीय नेता मुंडे की नाराजगी दूर करने पर विचार करते रहे। कई दौर की अनौपचारिक चर्चाओं के बाद देर शाम शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी के घर पर अध्यक्ष नितिन गडकरी, गोपीनाथ मुंडे, प्रभारी एम वेंकैया नायडू, महासचिव अनंत कुमार और वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह जुटे। रविवार को भी पार्टी नेतृत्व इस मामले को सुलझाने में नाकाम रहा था। मुंडे इस मांग पर अड़े थे कि उन्हें महाराष्ट्र का प्रभार दिया जाए या प्रदेश के मामलों में खुली छूट दी जाए। पार्टी इसके लिए तैयार नहीं हुई। मुंडे की शिकायत है कि गडकरी प्रदेश के मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप करते हैं और उनकी राय की जानबूझकर अनदेखी की जाती है।

 भाजपा की परंपरा में किसी नेता को गृहप्रदेश का प्रभार नहीं दिया जाता मगर मौका देखकर इस नियम को लचीला भी किया गया है। इससे पहले पार्टी के दिवंगत नेता और कद्दावर महासचिव प्रमोद महाजन महाराष्ट्र के और कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के प्रभारी बनाए जा चुके हैं। वैसे तो मुंडे व गडकरी बैर पुराना है, मगर मुंडे के बगावत का पर्चा बुलंद करने की ताजा वजह यह थी कि गडकरी ने मुंडे योगेश गोगावले के बजाय अपने करीबी विकास मठकरी को पुणे का अध्यक्ष बना दिया। इसके बाद मुंडे ने कांग्रेस, शिव सेना के बड़े नेताओं से मुलाकात की जिससे उनके पार्टी छोड़ने की अटकलें तैरने लगीं। पिछले तीन दिन से वह दिल्ली में केंद्रीय नेताओं से लगातार चर्चा कर रहे हैं।

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