केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के दफ्तर की सुरक्षा में ' गंभीर सेंध' लगाई गई थी। उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से इसकी 'गुप्त जांच' कराने का अनुरोध भी किया था। उनके दफ्तर में 16 अहम जगहों पर कोई चिपचिपा पदार्थ लगाया गया था। ऐसा लगता था कि जैसे किसी ने खुफिया नजर रखने के लिए यह हरकत की हो।
जिन जगहों पर चिपचिपा पदार्थ लगा था, उनमें वित्त मंत्री का खुद का दफ्तर भी शामिल है। इसके अलावा उनके सलाहकार ओमिता पॉल, निजी सचिव मनोज पंत के दफ्तरों, वित्त मंत्री द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले दो कांफ्रेंस रूम और ग्राउंड फ्लोर पर मुख्य कांफ्रेंस हॉल में भी में भी चिपचिपा पदार्थ मिला था।
वित्त मंत्री का दफ्तर नॉर्थ ब्लॉक में स्थित है। यहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहते हैं। इसके बावजूद हुई इस घटना से वित्त मंत्री सकते में थे परन्तु दफ्तर से कोई माइक्रोफोन या रिकॉर्डिंग उपकरण नहीं मिला था।
वित्त मंत्रालय के वीवीआईपी चैंबर में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की ओर से बुलाए गए निजी जांचकर्ताओं द्वारा किए गए 'इलेक्ट्रॉनिक स्वीप' के तीन दिन बाद (7 सितंबर, 2010) ही प्रणव ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी थी। सीबीडीटी वित्त मंत्रालय के अधीन काम करता है, लेकिन इस तरह के काम वह कभी नहीं करता। खास बात यह है कि दफ्तर में पाए गए चिपचिपा पदार्थ को लेकर जांच एजेंसियां अलग-अलग तरह की बात करती हैं। खुफिया ब्यूरो के मुताबिक सरकारी फोरेंसिक लैब ने बताया था कि चिपचिपा पदार्थ एक तरह का च्युइंग गम था। दूसरी ओर, सीबीडीटी और उनकी ओर से बुलाई गई निजी जांच एजेंसी का मानना है कि ये चिपचिपा पदार्थ किस ने जान-बूझ कर लगाया था, जिसकी मदद से कोई बहुत छोटा उपकरण लगाया गया हो सकता है और उसे बाद में निकाल लिया गया।

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