मानवता को शर्मशार करने वाली एक घटना मंगलवार को बिहार की राजधानी पटना में उजागर हुई। एक मां ने अपनी ममता का गला घोंटते हुए अपनी पुत्री को सात वर्षो तक एक कमरे में बंद रखा। अवसादग्रस्त इस महिला को बुरी हालत में पुलिस ने कमरे से मुक्त कराया।
गैर सरकारी संगठन प्रयास ने मंगलवार दोपहर बाद पुलिस की मदद से प्रियंका कुमारी (28) को बंद कमरे से मुक्त कराया। महिला को वहां से निकालने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि करीब 14 साल पहले 10वीं कक्षा में असफल हो जाने के बाद प्रियंका अवसाद में चली गई। इलाज के बावजूद उसका स्वास्थ्य गिरता गया। इस पर उसकी माता मालती देवी ने उसे अपने घर के एक कमरे में बंद कर दिया।
अधिकारी ने बताया, "शुरुआती इलाज कराने के बावजूद प्रियंका की मानसिक बीमारी कायम रहने पर उसकी माता ने पिछले सात वर्षो से उसे एक कमरे में बंद कर रखा था।" प्रियंका के पिता राजकुमार यादव ने पुलिस को बताया कि वह बुरी तरह अवसाद की चपेट में थी और उसकी माता उसके साथ बुरा बर्ताव करती थी। उन्होंने कहा, "मैं उसे बचाने में लाचार था।" प्रयास की अध्यक्ष सुमल लाल ने बताया कि यह काफी शर्मनाक है कि एक युवती को सात वर्षो तक एक कमरे में बंद रखा गया।
पुलिस ने बताया कि पटना में इस तरह का यह दूसरा मामला है। पिछले महीने एस.के.पुरी के समीप बाबू (32) और उनकी बहन सुजाता (28) को उनके शिवपुरी स्थित घर से बचाया गया। उन्हें प्रयास की मदद से मुक्त कराया गया। कुछ महीने पहले उत्तर प्रदेश के नोएडा में भी दो बहनों अनुराधा बहल (41) और सोनाली बहल (38) ने भी खुद को अपने घर के एक कमरे में बंद कर लिया था। इलाज के दौरान अनुराधा ने दम तोड़ दिया।

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